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संसार के भौतिक संसाधन साधन हैं साधना नहीं

7 वर्ष पहले
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संसारमें व्यक्ति इन्द्रियों के माध्यम से दिनभर कचरा एकत्रित कर मन में भरता है। धर्मसाधना से ही इन्द्रियों पर नियंत्रण किया जा सकता है। यह बात साध्वी र|रेखा श्रीजी ने महावीर जिनालय विकास नगर में बुधवार को 9 बजे आयोजित चातुर्मास धर्मसभा में उपस्थित धर्मावलंबियों को सं‍बोधित करते हुए कही। साध्वी अनुभवदृष्टा श्रीजी ने कहा आज देश में कई पूंजीपति धन एकत्र करने में लगे हैं। विचार करना चाहिए यह भौतिक संसाधन इन्द्रियों के सुख के लिए एकत्रित कर रहे हैं या आत्मकल्याण के लिए।

साध्वी श्रीजी ने कहा संसारी मानव सिर्फ भावी पीढ़ी संतान के भविष्य के लिए मकान सम्पत्ति धन संग्रह करके मरता है उसके परिवारजन को दुःख या परेशान नहीं होना पड़ेगा लेकिन युग पुरुष महावीर स्वामी ने संसार, तीन लोको के जीवों के लिए जिनवाणी के सिद्धांत बनाए उन संतों ने कितना चिंतन, तपस्या अनुसंधान किया था, तब ये सिद्धांत बने। इन सिद्धांतों से 21 हजार साल पृथ्वी के जीव सुखी रहेंगे, इन्हें कष्ट नहीं होंगे। धर्म के मार्ग पर चलने का सुगम रास्ता बताया, उसे सरल रास्ता भी बनाया। साधु संतों ने मंदिर तीर्थ, उपाश्रय बनाकर धर्म क्षेत्र की स्थापना की।

सत्संगआज

नीमच| निरंकारीसत्संग द्वारा सत्संग का आयोजन रखा है। सत्संग गुरुवार दोपहर 2 बजे से रेलवे इंस्टीट्यूट बघाना में रखा है। सत्संग में दिल्ली से आई बहन देवकुमारी उपस्थित रहेंगी।