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विदाई के समय छलक गए आंसू

7 वर्ष पहले
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चारमाह की तपस्या काल के दौरान श्रावक-श्राविकाओं को धर्म-कर्म का ज्ञान देने वाले साध्वीजी श्रीजी के चातुर्मास परिवर्तन एवं विहार की घड़ी आई तो श्रावक-श्राविकाएं भावुक हो उठीं। उनकी आंखों से आसुओं की धारा बह निकली। विदाई के समय र|रेखा श्रीजी, अनुभव दृष्टा श्रीजी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ग्रहण किया कई महिला श्रद्धालुओं नेे साध्वी श्रीजी के गले लगकर रोते हुए विदाई दी।

श्वेतांबर चातुर्मास समिति विकास नगर के तत्वावधान में गुरुवार को चातुर्मास परिवर्तन एवं विहार कार्यक्रम का आयोजन किया। विहार जुलूस बैंडबाजों एवं भजन कीर्तन की स्वर लहरियों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जैन श्वेतांबर शांतिनाथ जैन मंदिर पहुंचा। यहां नवानुप्रकार पूजन एवं देववंदन कार्यक्रम हुआ। जुलूस में मिलती है संगत साध्वियों की कभी कभी..., शहर में गूंजे केसरियो केसरियो..... आज म्हारे रंग केसरियो.... आदि भजन प्रस्तुत किए। साध्वी मंडल ने सांवलिया मंदिर, शांतिनाथ जैन मंदिर, महावीर जिनालय में आशीर्वाद ग्रहण किया।

साधुऔर सरिता बहते हुए ही अच्छे लगते हैं

साध्वीर|रेखा श्रीजी, कल्पदर्शिता श्रीजी,अनुभवदृष्टा श्रीजी ने कहा साधु और सरिता बहते हुए अच्छे लगते हैं। साधु साध्वी जहां जाते हैं वहां धर्म ज्ञान की अमृत गंगा बहाते हैं। इस अवसर पर जतन बहन सकलेचा, मनोरमा खाबीया, प्रकाश छाजेड़, प्रकाश जैन आकर्षण, संदीप लोढा, किरण सैनी सहित सैकड़ों गणमान्य लोग शामिल थे।

विदाई का समय आया तो साध्वी कल्पदर्शिताश्रीजी से महिला श्रद्धालु गले मिलकर रो पड़ीं।