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शहीदों को नमन कर किया मूर्ति अनावरण

7 वर्ष पहले
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देशको अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले शहीदों को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। शहीद भगतसिंह की 107वीं जयंती पर ज्ञानमंदिर के शहीद पार्क में रविवार को शहीद लाला हुकमचंद अग्रवाल (जैन) की स्मृति में प्रतिमा अनावरण किया।

हरियाणा के हिसार में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लाला हुकमचंद्र अग्रवाल की प्रतिमा शहीद स्मारक में शहीदों की प्रतिमा शृंखला में स्थापित की गई। नपाध्यक्ष नीता दुआ ने कहा वीर सपूतों की बदौलत ही हम आजादी की सांस ले रहे हैं। डॉ. एचएन गुप्ता, भाजपा नेता संतोष चौपड़ा, अनिल बंसल काका, दीपक गर्ग, कमल मित्तल, लोकेश परिहार, सीएमओ सविता प्रधान सहित समाजसेवी उपस्थित थे। शहीद लाला हुकमचंद के परिवार की सुपौत्री अनुपमा गर्ग ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला।

अंग्रेजोंसे लिया था लोहा -अनुपमा गर्गने कहा हुकमचंद जैन का जन्म 1816 में हरियाणा के हांसी (हिसार) में हुआ था। शिक्षा और प्रतिभा के बल पर मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के दरबार में उच्च पद प्राप्त किया। 1841 में मुगल बादशाह ने उन्हें हांसी और करनाल जिले के इलाकों का कानूनगो एवं प्रबंधकर्ता नियुक्त किया सात वर्षों तक मुगल दरबार में सेवा दी। अंग्रेजों ने हरियाणा को अपने अधीन कर लिया तो उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की। 15 नवंबर 1857 को मुगल बादशाह के व्यक्तिगत दस्तावेजों की जांच के दौरान लाला हुकमचंद और मिर्जा मुनीर बेग के हस्ताक्षरों वाला पत्र अंग्रेजों के हाथ लग गया। 19 जनवरी को 1858 को लाला हुकमचंद को उन्हीं के मकान के सामने फांसी दे दी। लालाजी के भतीजे फकीरचंद को अदालत ने बरी कर दिया था। बावजूद अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दे दी।

शहीद लाला हुकमचंद की प्रतिमा का अनावरण करते अतिथि।

मूर्ति अनावरण समारोह के दौरान 1857 की प्रथम क्रांति के शहीद लाला हुकमचंद अग्रवाल (40) एवं फकीरचंद अग्रवाल (12) की स्मृति में हांसी के सपूत पुस्तक का विमोचन भी किया।

पुस्तक का विमोचन