सुबह काम से निकाला, शाम को फिर रख िलया
नपापरिषद की बैठक नहीं होने का असर गुरुवार को दिखा। परिषद की पुष्टि बिना काम कर रहे 62 अस्थायी सफाई कामगारों को सीएमओ ने गुरुवार सुबह काम से निकालने के आदेश दिए। कामगार सफाई करने के बाद घर जा रहे थे, तब स्वास्थ्य अधिकारी श्याम टांकवाल ने आदेश सुनाया तो वे नाराज हो गए और नपा कार्यालय में एकत्र हो कर विरोध जताने लगे। नपाध्यक्ष नीता दुआ और सीएमओ सविता प्रधान कार्यालय पहुंची। सफाई मजदूर विकास महासंघ अध्यक्ष दीपक सरसवाल पार्षद अमितकुमार शर्मा ने नपाध्यक्ष सीएमओ तक अपनी बात पहुंचाई। काफी देर बाद कर्मचारी नपाध्यक्ष के कैबिन में पहुंचे तो वे बाहर गईं और यह कह कर चली गईं कि मेरी तरफ से आप काम करो, आपको कोई नहीं निकालेगा। यह सुन कर्मचारियों का गुस्सा कुछ कम हुआ और वे सीएमओ के कैबिन में पहुंचे बात रखी। बात सुनने के बाद सभी को आश्वस्त किया अभी आपको नहीं निकाला जा रहा है। आप काम जारी रखें। इसके बाद वे शांत हुए। विनय पथरोड़, संजय बार्से, नवीन घावरी, अर्जुन कल्याणी, ममता सौदे सहित अस्थायी सफाई कामगार मौजूद थे।
क्यों बनी यह स्थिति
नपामें काम के लिए अस्थायी कर्मचारी को 89-89 दिन के लिए रखा जाता है। इन्हें काम पर रखने की स्वीकृति परिषद की बैठक में हाेती है। जिन अस्थायी सफाई कामगारों को हटाया है। उनकी कार्य अवधि बढ़ाने के लिए परिषद की बैठक के एजेंडे में प्रस्ताव हैं लेकिन तीन बार बैठक टल चुकी है। ऐसे में इनकी कार्य अवधि 89 दिन बढ़ाने का प्रस्ताव अटका हुआ है। इनकी कार्य अवधि समाप्त हो जाने के कारण सीएमओ ने यह कदम उठाया था। समय पर बैठक हो जाती तो ये हालात नहीं बनते।
ऐसे कैसे काम होंगे
^सीएमओएक तरफ सफाई व्यवस्था सुचारु बनाने के लिए कह रही हैं। दूसरी ओर इस प्रकार का निर्णय लेना तर्क संगत नहीं था। जब पार्षदों ने पहले ही लिख कर दे दिया तो ऐसा आदेश क्यों जारी किया। यह अच्छी बात है कि सीएमओ ने वापस रखने के आदेश दिए। अमितकुमार शर्मा, पार्षद
कामसे नहीं हटाया
^परिषदकी स्वीकृति नहीं मिली थी। कार्य अवधि समाप्त हो गई थी। इसलिए निकालने के आदेश दिए थे। सुबह कलेक्टर नपाध्यक्ष से चर्चा के बाद काम से नहीं निकालने का निर्णय लिया है। परिषद एजेंडे में यह प्रकरण है इसलिए पुष्टि की प्रत्याशा में काम पर रखने के आदेश दिए हैं। सविताप्रधान, सीएमओनगरपालिका
एक माह से वेतन भी नहीं मिला
^पांचवर्ष से