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अहंकार की भावना बदलने के लिए दृष्टि भी बदलें

6 वर्ष पहले
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अहंकारकी भावना बदलने के लिए दृष्टि बदला होगी। जो भी महावीर की वाणी धारण करेगा वह महावीर बनेगा। जीवन आना-जाना है, यह दु:ख-सुख का मेला है।

यह बात आचार्य डॉ. शिवमुनि ने कही। वे बुधवार को नीमच सिटी जैन दिवाकर गुरुदेव की जन्मस्थली में श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। आचार्य श्री ने कहा जीवन के लक्ष्य पहचानों और उसके अनुसार आचरण करते हुए आगे बढ़ो। सफल होने के लिए सदैव प्रयास करते रहना चाहिए। धर्मसभा से पहले सुबह 9 बजे आचार्य डॉ. शिवमुनि का मंगल प्रवेश हुआ। उनकी अगवानी के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिटी के अध्यक्ष उमरावसिंह राठौर सचिव विजय बाफना ने फव्वारा चौक पर आचार्य की आगवानी की।

शोभायात्रामें लगे जयकारे- आचार्यडॉ. शिवमुनि की शोभायात्रा प्रमुख मार्गों बाजार से होते हुए पुलिस चौकी के पास जैन मांगलिक भवन पहुंची। इस दौरान शोभायात्रा में भगवान महावीर के जयकारे गूंजे। इस मौके पर समाजसेवी संतोष चौपड़ा, श्री संघ अध्यक्ष राठौर, सचिव बाफना, दिलीप कटारिया, सरदारसिंह कोचेटा शिवसिंह कोचेट सहित श्रद्धालु उपस्थित थे।

स्वाध्यायहॉल का लोकार्पण

धर्मसभाके बाद राष्ट्र संत कमलमुनि ‘कमलेश’ के 58वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में जैन दिवाकर स्वाध्याय हॉल का लोकार्पण किया गया। वरिष्ठ उपाध्याय मूलमुनि, सौभाग्य मुनि, श्रमण संघी महामंत्री शिरीष मुनि, श्रमण संघी महामंत्री महेंद्र ऋषि, नेपाल केसरी मणिभद्र मसा आदि ने आशीर्वचन दिए।

जैन दिवाकर गुरुदेव की जन्मस्थली में आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविका।

धर्मसभा