फसलों पर पहले यूरिया अब मौसम की मार
किसानोंकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले बेतहाशा बिजली कटौती और यूरिया नहीं मिलने से परेशान थे, अब मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। आपेक्षित ठंड नहीं पड़ने से फसलों की बढ़ावा रुक गई है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
मौसम का मिजाज रबी फसलों को रास नहीं रहा है। दिसंबर का पहला हफ्ता गुजरने के बाद भी फसलों के अनुरूप ठंड नहीं पड़ी। इसका असर गेहूं-चने की फसल पर पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार यदि मौसम ऐसा ही रहा तो फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों ने बताया नवंबर में रबी की बोवनी की थी। फसलें तीन से चार सप्ताह की हो गई हैं। ऐसे में फसलों की ज्यादा देखभाल की जरूरत है। पहले पहले यूरिया नहीं मिलने से परेशान होना पड़ा और उसके बाद बिजली कटौती के चलते ठीक से सिंचाई नहीं कर पाए। अब ठंड पर्याप्त नहीं पड़ने से पौधों की ग्रोथ रुक गई है।
इल्लीने बढ़ाई मुसीबत- चनेपर इल्लियों का प्रकोप है। इससे भी किसान चिंतित हैं। इल्लियां पत्तियां चट कर रही हैं। किसानों को महंगे कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ रहा है। यदि पर्याप्त ठंड पड़े तो इल्लियां खत्म हो जाएंगी।
बढ़रही परेशानी- जावीके अशोक जैन, पालसोड़ा के सुभाष राजपूत जीरन के उमेश मुकाती ने बताया शुरुआत से ही ठंड कमजोर है। पूरा नवंबर और अब दिसंबर का पहला हफ्ता भी ठंड नहीं पडऩे से नुकसान हो रहा है। फसल के लिए अभी ठंड फायदेमंद है। फूल आने के दौरान ठंड पड़ने से नुकसान हो सकता है। दो साल से फसलों में फूल आने पर ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे नुकसान उठना पड़ रहा है।
चने की फसल देखता किसान।
फैक्ट फाइल
फसल लक्ष्य बोवनी
गेहूं54 हजार 45 हजार
चना 30 हजार 12 हजार
सरसों 28 हजार 8 हजार
(आंकड़े हैक्टेयर में)
जैविक तरीके अपनाएं
^भरपूरठंड नहीं पड़ने पर फसलों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में चने पर इल्लियों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है। किसान जैविक तरीके अपनाकर नुकसान से बच सकते हैं। सीएलकेवड़ा, उपसंचालक-कृषि विभाग, नीमच