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30 दिनी तप पूरे, निकला वरघोड़ा

7 वर्ष पहले
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अनामिकाके महामृत्युंजय तप की उग्र तपस्या पर 30 उपवास के पूर्ण होने पर बैंडबाजों के साथ वरघोड़ा निकाला। काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जुलूस में भगवान महावीर के जयकारे गूंजायमान होते रहे।

रविवार सुबह 8 बजे बगीचा नं. 13 सिटी रोड नीमच से वरघोडा निकाला। शोभायात्रा में युवक-युवतियां महावीर के भजनों पर नृत्य करते चल रहे थे। वरघोडा बगीचा नं. 13 से सांवलियाजी मंदिर नीमच सिटी मार्ग, जैन मंदिर पहुंचा जहां प्रभु दर्शन एवं तपस्वी अनामिका द्वारा आशीर्वाद ग्रहण करने के बाद वरघोडा पुनः नीमच सिटी के प्रमुख मार्गों से होता हुआ सुंदरम मैरिज गार्डन पर पहुंचकर धर्मसभा एवं बहुमान समारोह में परिवर्तित हो गया।

तपस्या संयम बिना मानव पशु समान

तपस्यासंयम बिना मानव पशु समान है। तपस्या बिना जीवन नहीं बढ़ता। हर तपस्या का लक्ष्य पापों का नाश का उद्देश्य होना चाहिए। हजार साल बीत गए लेकिन महावीर के उपवास की पद्धति आज भी वही है। अनामिका एवं उनका परिवार साधुवाद का पात्र है। यह बात अनामिका मारू के 30 उपवास की तपस्या पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को सुंदरम मैरिज गार्डन में आयोजित तपस्वी बहुमान धर्मसभा में साध्वी भव्य पूर्णा श्रीजी ने कहीं। साध्वी श्रीजी ने कहा विद्यार्थी निरंतर अभ्यास करें तो ज्ञान अर्जित कर सकता है। सामाजिक क्षेत्र में विकास जरूरी है। मानव हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है धर्म में पिछड़ रहा है। साध्वी अनुभव दृष्टा श्रीजी ने कहा मानव चिंतन करें बार बार भोजन करने वाले रोगी, होटल में खाने वाले हॉस्पिटल में जाते हैं। लोगों ने पेट को कचरापेटी बना रखा है। दो बार भोजन करें वह भोगी, एक बार भोजन करें वह योगी होता है।

प्रेमप्रकाश जैन, केसरीमल कोठीफोड़ा आदि समस्त समाजजन द्वारा तपस्वी अनामिका का शॉल, श्रीफल प्रशस्ति-पत्र से बहुमान किया। नीमच सिटी इंदिरा नगर वासुपूज्य संघ, महावीर जिनालय विकासनगर, पुस्तक बाजार आदि श्रीसंघों एवं जैन नवयुवक मंडल एवं सभी महिला मंडलों द्वारा अनामिका का बहुमान किया।

अनामिका का बहुमान

बग्घी में सवार तपस्वी अनामिका।

वरघोड़े में उमड़े समाजजन।