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दया-भाव से संभव है ईश्वर की प्राप्ति

7 वर्ष पहले
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{नानीबाई का मायरा कथा के दौरान आचार्य चंद्रदेव ने कहा

सिटीरिपोर्टर | नीमच

भक्ति,ज्ञान सत्संग से मानव के कष्ट दूर होते हैं। यदि मानव में दया भाव विनमृता है तो उसे ईश्वर की प्राप्ति संभव है। हमें भक्ति का महत्व समझना है तो नानीबाई का मायरा कथा श्रवण करना चाहिए।

यह बात आचार्य चंद्रदेव ने कही। वे जवासा में दशरथसिंह चौहान जगन्नाथ वैध द्वारा आयोजित नानीबाई का मायरा कथा के दौरान बोल रहे थे। आचार्य ने कहा हम पाप छोड़कर पुण्य-परमार्थ की भक्ति का पलड़ा थामें। पाप का मार्ग धीरे-धीरे खींचता है। पाप का पिता लोभ है, हम लोभ का त्याग करें। अच्छे कर्म करने वाला व्यक्ति अच्छे कुल में जन्म लेता है। आज हर आदमी स्वर्ग मे जाना चाहता है लेकिन उसके लिए परमार्थ करना आवश्यक है। हम पड़ोसियों के दुख-दर्द दूर करने की कोशिश करें, क्योंकि वही हमारे दुख में काम आते हैं। भक्ति करने वाला कभी थकता नहीं। भौतिक संसार के धन कमाने में थकान होती है। नरसी मेहता ने भक्ति का साथ कष्ट में भी नहीं छोड़ा। उनकी बेटी के विवाह में उसके पास नहीं था। ऐसे में भगवान कृष्ण ने 56 करोड़ का मायरा भरा। नरसी भक्ति में लीन थे। भगवान की हुंडी पर द्वारिका में भगवान कृष्ण सांवरा सेठ के भेष में आए। उन्होंने हुंडी का धन दिया भक्त को कष्ट से बाहर निकाला। भक्ति सच्ची है तो भगवान भक्त के कष्टों का निवारण अवश्य करते हैं।

कथा सुनते श्रद्धालु।