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आचार्य की अगवानी के दौरान दिखा साम्प्रदायिक सौहार्द

6 वर्ष पहले
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आचार्यडॉ. शिवमुनिजी और साधु-साध्वियों का नगर प्रवेश साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गया। उनकी अगवानी हर धर्म संप्रदाय के लोगों ने किया। इस दौरान सभी एक स्वर में जयकारा लगा रहे थे। आचार्यश्री साधु-साध्वियां अगले महीने इंदौर में होने वाले वृहद साधु सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं।

मंगलवार सुबह 9 बजे कलेक्टोरेट चौराहे से जुलूस के रूप में डॉ. शिवमुनिजी ने 32 साधु 32 साध्वियों के साथ प्रवेश किया। उनकी अगवानी के लिए जैन समाज की सभी शाखाओं के साथ बोहरा समाज, मुस्लिम समाज, आरएसएस के स्वयंसेवक सहित कई समाजों के लोग पहुंचे। साधु-संतों के जयकारे के साथ चल समारोह मुख्य मार्गों से होकर एलआईसी मार्ग स्थित राठौर परिसर पहुंचा। यहां सुबह 10 बजे धर्मसभा हुई। डॉ. शिवमुनि के साथ संत महेंद्रऋषि नेपाल केसरी, मणिभद्र मुनि सहित 32 साधु 32 साध्वियां हैं।

आचार्यश्री बुधवार सुबह 9 बजे जैन स्थानक भवन कैंट से नीमच सिटी के लिए विहार करेंगे। मंगलवार को अगवानी के दौरान नपाध्यक्ष राकेश जैन पप्पू, विधायक दिलीपसिंह परिहार, जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, श्रीवर्धमान स्थानक जैन श्रावक संघ अध्यक्ष महेंद्र बम्ब, भारत जारौली, संतोष चौपड़ा, अजीत बम्ब आदि मौजूद थे।

सादगीआगे बढ़ाती है- धर्मसभामें आचार्य ने कहा आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए रोज ध्यान साधना करना चाहिए। जीवन में सादगी ही उच्चस्तर की ओर अग्रसर करती है। आचार्य ने स्वयं को जानने पर बल देते हुए कहा इंसान को पहले अपने अंदर झांक लेना चाहिए। उसके बाद ही कोई निर्णय या विचार प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने ध्यान-साधना के तहत आत्मबोध, आत्मावलोकन आत्मानुभव, ध्यान संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। संचालन कमलमुनि कमलेश सविता चौपड़ा ने किया।

डिस्पोजलका बहिष्कार किया- आयोजनके दौरान हुए सामूहिक भोजन में प्लास्टिक की डिस्पोजल कटोरियों गिलास आदि का उपयोग नहीं किया गया। इनकी जगह थाली-कटोरी तांबे के लोटे का उपयोग किए।

धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाएं। फोटो भास्कर

आचार्य डॉ. िशवमुनिजी और साधु-साध्वियों की संत की अगवानी पर इस तरह निकला जुलूस।