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सीआरपीएफ क्षेत्र की सुरक्षा दीवार में सेंध

6 वर्ष पहले
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देशकी अंदरूनी सुरक्षा संभालने वाली सीआरपीएफ के अपने क्षेत्र की सुरक्षा में सालों से सेंध लगी है। चार साल पहले बारिश के दौरान तेज बहाव में बाउंड्रीवॉल कई स्थानों पर ढह गई थी। यह अब तक नहीं बनी है। बाउंड्रीवॉल जगह-जगह से टूटी होने से अवांछित तत्व पशु घुस जाते हैं। यह कभी भी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।

सीआरपीएफ क्षेत्र के सभी गेट पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। कैमरे भी हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं लेकिन बाउंड्रीवॉल पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है। यह 6-7 जगह से टूटी है। जहां से मवेशी और कचरा बीनने वाले आए दिन क्षेत्र में घुस जाते हैं। इससे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

सुरक्षा के लिहाज से सीआरपीएफ क्षेत्र के चारों ओर 11 किमी की दीवार बनाई गई थी। अगस्त 2011 में आई जोरदार बारिश के दौरान तेज बहाव के कारण दीवार को नुकसान पहुंचा। कलेक्टोरेट जिला पंचायत कार्यालय के पीछे के नाले के कारण दीवार को ज्यादा नुकसान पहुंचा था। कई जगह तो नींव ही उखड़ गई। सीआरपीएफ के स्थानीय अधिकारियों द्वारा इसकी जानकारी आला अधिकारियों को दी जा चुकी है। बावजूद अब तक ठीक नहीं हुई।

गृहमंत्रालय में अटकी दीवार- दीवारठीक करने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण ने दीवार की मरम्मत के लिए 2011 में 60 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाया था। यह स्वीकृति के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा गया था। समय ज्यादा होने पर 2012-13 में पुन: एस्टीमेट बनाना पड़ा जिसमें मरम्मत की लागत बढ़कर 88 लाख रुपए हो गई। इसे भी गृह मंत्रालय भेजा गया था। यह आज तक स्वीकृत नहीं हुआ।

स्वीकृति का इंतजार

^एस्टीमेटबनाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा है। स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य शुरू हो पाएगा। नारायणसिंहहाड़ा, सब इंजीनियर- सीपीडल्यूडी

तार फेंसिंग की है

^तारफेंसिंग की गई है। केंद्र से स्वीकृति मिलते ही बाउंड्रीवॉल की मरम्मत करवाई जाएगी। आरजीआरभट, पुलिस उप महानिरीक्षक, सीआरपीएफ

सीआरपीएफ क्षेत्र की बाउंड्रीवॉल का का फाउंडेशन ही उखड़ गया है।