दो किमी में चार डेंजर जोन
शहर के बीच से गुजर रहे हाईवे पर दो किमी में चार डेंजर जोन है। सालभर में एक दर्जन हादसों में छह लोगों की मौत हो गई बावजूद तो गति नियंत्रण रहता है और ट्रैफिक विभाग ध्यान देता है।
सिटीरिपोर्टर | नीमच
जावरा-नयागांवफोरलेन का बायपास बनने के बावजूद शहर में भारी वाहनों का दबाव कम नहीं हो रहा है। दिनरात भारी वाहन बेखौफ शहर से गुजरते हैं। ट्रैक्टर फर्राटे से दौड़ते हैं। रिलायंस पेट्रोल पंप से ग्वालटोली तक दो किमी में चार डेंजर जोन है। माधाेपुरी बालाजी की पुलिया, बारादरी चौराहा, फव्वारा चौक, एसपी ऑफिस, ग्वालटोली पुलिया जहां आए दिन हादसे होते हैं। एक साल में एक दर्जन से ज्यादा हादसे यहां हो चुके हैं। इनमें छह से ज्यादा मौत हो गई। बावजूद प्रशासन ध्यान दे रहा है और पुलिस। आए दिन हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस ने वाहन चालकों की गति सीमा निर्धारित करने के लिए स्पीड लिमिट के बोर्ड तक नहीं लगाए। पुलिया चौड़ीकरण का काम अटका हुआ। दोनों पुलिया छोटी हैं। आए दिन वाहन भिड़ते हैं।
इनकीलापरवाही
गतिसीमा-20, दौड़ते हैं 80-100
शहरसे निकल रहे हाइवे की वाहनों की स्पीड 20 से ज्यादा नहीं होना चाहिए लेकिन 80 से 100 की स्पीड में वाहन दौड़ते हैं। कई बार हादसे होते हैं और लोगों की जान चली जाती है।
जिम्मेदार> यातायातविभाग को तेज गति से वाहन चलाने वालों पर सख्ती करना चाहिए। चालान के अलावा कोई काम नहीं होता। कई वाहन चालक दबाव में छूट जाते हैं। चालानी कार्रवाई का असर नहीं होता।
सड़कठीक पुलिया
दोकिमी के हाइवे पर सड़क ठीक पुलिया। माधोपुरी बालाजी और ग्वालटोली दोनों पुलिया संकरी है। आए दिन वाहन टकराते हैं।
जिम्मेदार>लोक निर्माणविभाग ने पुलिया चौड़ीकरण के लिए कदम नहीं उठाए। विभाग लापरवाह रहा तो जनप्रतिनिधि बेपरवाह।
गड्ढेबनते हादसे का कारण
हाईवेपर हो रहे गड्ढे कई बार हादसे का कारण बनते हैं। वाहन चालकों काे ज्यादा ध्यान गड्ढों से बचने में रहता है। इसी दौरान दूसरे वाहनों से भिड़ जाते हैं।
जिम्मेदार> नपारोड निर्माण विभाग का होने से मरम्मत नहीं करती। लोक निर्माण विभाग बड़े हादसे होने पर ही जागता है।
तीन महीने पहले इसी चौराहे पर एकता कॉलोनी की एक वृद्धा को क्रेन ने कुचल दिया था। 60 वर्षीय रामीबाई उस समय रास्ता पार कर रही थी तभी हादसा हो गया। इतने व्यस्त चौराहे पर वाहन 60-80 स्पीड से दौड़ते