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सूचना-पत्र पर खड़ा हो गया बवाल

7 वर्ष पहले
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एकसूचना पत्र को लेकर नपा में बवाल खड़ा हो गया। सूचना पत्र था नगरपालिका परिषद की बैठक का जो शुक्रवार को होना थी लेकिन बवाल मचने से टल गई। अब यह बैठक कब होगी, यह तय नहीं।

दो बार स्थगित हुई नपा की बैठक तीसरी बार होने से पहले स्थगित हो गई। बैठक शुक्रवार को होना थी लेकिन सूचना पत्र से मचे बवाल के बाद अब नहीं हो पाएगी। बवाल तब शुरू हुआ जब सीएमओ सीपी रॉय की बिना अनुमति के बैठक का सूचना पत्र जारी कर दिया। सीएमओ रॉय शहर से बाहर होने के कारण बैठक को तैयार नहीं थे। नपाध्यक्ष बैठक पर अड़ गईं। दोनों के बीच तनातनी चल रही थी कि 16 सितंबर को नगरपालिका से बैठक का सूचना पत्र जारी हो गया। सूचना पत्र पर सीएमओ की जगह कार्यपालन यंत्री अतुल वर्मा के हस्ताक्षर थे। पता सीएमओ को चला तो वे वर्मा पर बिफर पड़े। उन्होंने वर्मा को फटकारा बिना अधिकार के हस्ताक्षर कैसे कर दिए। वर्मा ने अनभिज्ञता जताई और कहा मैंने सूचना पत्र जारी नहीं किया गलती से हस्ताक्षर हो गए हों। दो दिन से मचे बवाल के बाद सीएमओ ने वर्मा को नोटिस थमा दिया। पहला सूचना पत्र निरस्त करने के लिए दूसरा सूचना पत्र जारी किया।

नपाध्यक्षचाहती है बैठक सीएमओ नहीं

दोबार स्थगित हुई बैठक तीसरी बार आयोजित करने के लिए नपाध्यक्ष नीता दुआ और कुछ पार्षद प्रयासरत थे। सीएमओ पक्ष में नहीं। दो बार मामला सीएमओ के पास गया तो उन्होंने शहर से बाहर होने से बैठक के लिए तारीख तय नहीं की। नपाध्यक्ष ने प्रोसिडिंग में लिखा सीएमओ की उपस्थिति के बिना बैठक हो सकती है। वर्मा या सहायक यंत्री कैथवास ओएल मंधारा प्रभारी सीएमओ के रूप में बैठक ले सकते हैं। सीएमओ ने जवाब नहीं दिया। इसी बीच आश्चर्यजनक रूप से सूचना पत्र जारी हो गया। जिस पर वर्मा के हस्ताक्षर थे और बवाल मच गया।

पत्र जारी करने का अधिकार मुझे

^बैठकके लिए सूचना पत्र जारी करने का अधिकार सिर्फ मुझे हैं। मैंने किसी काे प्रभार नहीं दिया था तो फिर सूचना पत्र कैसे जारी हुआ। इसके लिए वर्मा को नोटिस दिया है। उन्होंने हस्ताक्षर कैसे किए। मैं बाहर हूं, कोई बैठक नहीं होगी। सूचना पत्र कैसे जारी हुआ। जांच कराएंगे। सीपीरॉय, सीएमओ,नगरपालिका, नीमच।

जनहितसे कोई मतलब नहीं

^अधिकारी-कर्मचारीकर्तव्यों को नहीं समझ रहे। इन्हें जनहित से कोई लेना-देना नही। जब मैंने किसी सक्षम अधिकारी की उपस्थिति में बैठक आहूत करने के ल