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निजी जमीन पर ही निकाल दिया 200 फीट का रास्ता
उपनगरग्वालटोली के पास सर्वे नंबर-97/2 की जमीन से 200 फीट लंबा रास्ता पावर हाउस के पास भोलियावास मुख्य मार्ग से जुड़ रहा है। इस रास्ते को लेकर खेत मालिक और प्रशासन आमने-सामने हैं। खेत मालिक राधेश्याम धाकड़ का दावा है प्रशासन के नुमाइंदों ने भूमाफियाओं से सांठगांठ कर उनके खेत में रास्ता निकला दिया। इसके चलते 200 फीट लंबी जमीन मुफ्त में चली गई। प्रशासन का तर्क है रास्ता पहले से था। खेत मालिक ने अतिक्रमण कर खेत में मिला लिया। विवाद के निपटारे के लिए सालभर पहले तत्कालीन कलेक्टर विकास सिंह नरवाल ने खड़े रहकर सीमांकन कराया तो रास्ता सरकारी जमीन पर निकला। बाद में अतिक्रमण का केस तहसील न्यायालय में दायर कर दिया। खेत मालिक राधेश्याम धाकड़ ने एक तरफा़ सीमांकन का आरोप लगाते हुए भोपाल तक शिकायत कर दी। उनका आरोप है पास के खेत मालिक को फायदा देने के लिए पटवारी घनश्याम पांडे और तत्कालीन तहसीलदार शाश्वत शर्मा ने मेरे खेत में रास्ता निकाला। बाद में इस षड्यंत्र में प्रशासन के दूसरे अधिकारी भी मिल गए। धाकड़ प्रकरण को नीमच से लेकर भेापाल तक उठा चुके हैं लेकिन उन्हें कहीं भी न्याय नहीं मिला। उनकी मांग है जमीन का वास्तविक सीमांकन किया जाए, जिससे सरकारी जमीन और निजी जमीन की हकीकत सामने जाएगी।
झूठे हैं आरोप कार्रवाई सही
हमारे नक्शे में जमीन निजी
जमीन सरकारी आरोप झूठे
कलेक्टर ने कराया सीमांकन, मंजूर नहीं
^जो आरोप लगाए हैं वह गलत हैं। 16 अक्टूबर 2013 को स्वयं कलेक्टर ने मौके पर उपस्थित होकर सीमांकन कराया था। हमारे रिकॉर्ड और शिकायतकर्ता के रिकॉर्ड से मिलान कर सीमांकन किया था। हम गलत होते तो कलेक्टर हमारे खिलाफ कार्रवाई करते। शिकायतकर्ता ने स्वयं लिखकर दिया कि उसका सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हैं वह उसे हटा लेगा। घनश्यामपांडेय, पटवारी
मामले की शिकायत उज्जैन कमिश्नर को हुई तो कलेक्टर ने जिला स्तरीय सीमांकन समिति बनाई। 16 अक्टूबर2013 को तत्कालीन कलेक्टर ने समिति सदस्यों के साथ खड़े रहकर सीमांकन कराया। इसमें दो तहसीलदार और चार राजस्व निरीक्षक और पटवारी की टीम शामिल की। दो-तीन घंटे चले सीमांकन में रास्ते की जमीन सरकारी निकली। कलेक्टर की मौजूदगी के सीमांकन से धाकड़ संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है एक तरफा सीमांकन किया। हमारी सुनी तक नहीं गई।
^शिकायतकर्ता के आवेदन पर तत्कालीन कलेक्टर ने जिलास्तरीय स