पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बेटियों को मारेंगे तो बहू कहां से लाएंगे

बेटियों को मारेंगे तो बहू कहां से लाएंगे

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
स्त्रीके कई रूप में हमने देखे हैं। वह घर-आंगन की रौनक है, सम्मान है, प्रतिष्ठा है, बेटी है, बहू है, मां है और बहन है। बेटियों को अगर गर्भ में मार दिया जाएगा तो बहू कहां से लाएंगे। एक बार यह कदम उठाने से पहले अपनी मां की शक्ल जरूर देख लेना।

यह बातें मानव अधिकार आयोग के मंच पर जुटे अतिथियों ने कही। सभी ने कहा भ्रूण हत्या एक अभिशाप है। रेडक्रॉस सभागार में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एएसपी पंकज पांडे थे। उन्होंने कहा भ्रूण हत्या को समाज में जागरूकता के बाद रोका जा सकेगा। बेटा-बेटी एक समान होंगे तभी समाज में नवनिर्माण का शंखनाद होगा। उन्होंने कहा कानून में कड़े प्रावधान हैं लेकिन समाज में जागरूकता जरूरी है। हम से आदिवासी बेल्ट अच्छा है। मंडला डिंडोरी और झाबुआ में लड़की-लड़के में अंतर नहीं किया जाता। रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन रवींद्र मेहता, जिला महिला बाल विकास अधिकारी रेलम बघेल, आयोग मित्र भानु डाॅ.के.के. वास्कले, किशोर जेवरिया ने भी विचार रखे। सुरेंद्रसिंह शक्तावत, कैप्टन केएल बोरीवाल, डाॅ. पूरण सहगल, उषा गुप्ता, शीलू व्यास, अर्जुनलाल नरेला, सरोज गांधी, दर्शनसिंह गांधी, विजय बाफना, काशीराम बोरीवाल सहित गणमान्यजन उपस्थित थे।

इनकाकिया सम्मान-कार्यक्रम मेंबेटी बचाओ अभियान में उल्लेखनीय योगदान के लिए राजेश लखेरा, उषादेवी लखेरा, आलोक मालू, भावना मालू, शेखर तिवारी, प्रीति तिवारी, अब्बास अली डेरकी, शाहीन डेरकी, भूषण देशपांडे, उमा देशपांडे, ज्ञानचंद चौरडिय़ा, डाॅ.राजेंद्र ऐरन, डाॅ. भावना ऐरन का सम्मान किया गया।

उपस्थित नागरिक। इनसेट-कार्यक्रम को संबोधित करते एएसपी।