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दवा से हो जाए साइड इफैक्ट तो सीधे कर सकेंगे शिकायत

7 वर्ष पहले
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जिलेमें साइड इफैक्ट से आए दिन मौत होती है। गलत इंजेक्शन के कारण मरीज जान गवां देते हैं। स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर लेता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य और कल्याण मंत्रालय ने फॉर्मा को विजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया की शुरुआत की है। इसके तहत विभिन्न राज्यों में एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनीटरिंग सेंटर की स्थापना की है। दवा, टीका या इंजेक्शन से किसी तरह का साइड इफेक्ट होगा तो मरीज या परिजन सीधे फॉर्मा-को विजलेंस पर शिकायत कर सकेंगे। शिकायत पर विजलेंस संबंधित डॉक्टर या दवा कंपनी कार्रवाई करेगी। मरीज या परिजन को साइड इफैक्ट के लिए शिकायत के साथ रिपोर्टिंग फाॅर्म भरकर भेजना होगा। जरूरी नहीं रिपोर्टिंग फाॅर्म वे भरेंगे जो इलाज कर रहे हैं। मरीज दूसरे डॉक्टर से जांच बाद भी रिपोर्टिंग फाॅर्म भरकर भेज सकते हैं। इसके बाद विजलेंस ऐसी कंपनी और लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई कर सकती है।

एनेस्थेसिया में मौत

4फरवरी 2014 में रोटरी मेघा शिविर के दौरान धामनिया निवासी शिवसिंह ऑपरेशन के लिए चयनित किया। जिला अस्पताल में ऑपरेशन से पहले एनेस्थेसिया का इंजेक्शन दिया। गलत इफेक्ट से मौत हो गई। मामले में मजिस्ट्रियल जांच चल रही है।

इंजेक्शन हो गया था फेल

23अगस्त 2014 को रेवली-देवली से गर्भवती महिला संगीताबाई को जिला अस्पताल लाया गया था। ऑपरेशन से डिलेवरी करने के लिए डॉक्टर ने एनेस्थेसिया का इंजेक्शन लगाया। असर नहीं हुआ केटामिन का इंजेक्शन दिया। इफैक्ट से महिला की चलते ऑपरेशन में मौत हो गई थी।

देना होगी यह जानकारी

रिपोर्टिंगफार्म में मरीज का नाम, पता, उम्र, वजन टेलीफोन, मोबाइल नं, ईमेल, बीमारी का इलाज कर रहे डॉक्टर, फॉर्मासिस्ट या सेल्फ मेडिकेशन का पता, दवा लेने के बाद किस तरह साइड इफैक्ट कितना बुरा था। दवा की मात्रा, अस्पताल में भर्ती दिनांक, मृत्यु दिनांक आदि जानकारी देना होगी।

येमिलेगा फायदा

नएनियम से आम आदमी को डाक्टर द्वारा रिपोर्ट भेजने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वयं रिपोर्ट भेजने की सुविधा मिलने से वह तत्काल दवा के साइड इफैक्ट की जानकारी दे सकेगा। साथ ही फार्मा-को विजलेंस सेंटर को तुरंत जानकारी मिल सकेगी। इससे वह ऐसी दवाओं की बिक्री और निर्माण पर रोक की कार्रवाई को अंजाम दे सकेगा।

साइड इफैक्ट- अब तक गई दो जान

^दवा के स