हर मानव को मिले अधिकार
मानवाधिकारमानव के मूलभूत अधिकार हैं। उसे ये हर हालत में मिलना ही चाहिए। जब व्यक्ति को उसके अधिकार से वंचित किया जाता है तो यह हनन की श्रेणी में आता है।
यह बात एसपी रुडोल्फ अल्वारेस ने बुधवार को कनावटी स्थित ज्ञानोदय महाविद्यालय में मानव अधिकार दिवस पर आयोजित वृद्धजन संगोष्ठी में कही। वे आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मानव की वैयक्तिक गरिमा की रक्षा के लिए विश्व स्तर पर 1948 से मानव अधिकार दिवस मनाया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य मानव अधिकार का संरक्षण करना है। प्रो. अरुण जायसवाल ने कहा वृद्धों की बड़ी समस्या एकाकी जीवन है। वृद्धजन जिसे अपना जीवन साथी बनाना चाहते हैं वे उन्हें उपेक्षा की दृष्टि से देखते हैं। अपने ही घर में वृद्धों की उपेक्षा होती है तो बड़ी पीड़ा होती है। वृद्ध तो भोर का वह दीया है जिसे एक दिन बुझना ही है। उसे ममत्व प्रदान करें तो वह थोड़े दिन और जीवित रहेगा। वृद्धों के प्रति संवेदना अत्यंत आवश्यक है। पूर्व मंत्री घनश्याम पाटीदार ने वृद्धों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण बर्ताव की अपेक्षा की। उन्होंने कहा वृद्धों के अनुभव का लाभ लें और उन्हें उपेक्षित समझें। उनका जीवन खुली किताब की तरह होता है। इससे प्रेरणा ली जा सकती है। डाॅ. पूरण सहगल ने कहा वृद्धाश्रम जाने के बजाय घर को ही आश्रम बनाएं। इससे वृद्धों को अपने घर में सम्मान मिले और वे आदर्श परिवार की नींव बन सकें। सामाजिक चेतना की आवश्यकता वृद्धों को भी है। उनकी समस्याओं का समाधान कानून के बजाय परिजन के अपनत्व की भावना से होगा। डॉ. माधुरी चौरसिया, संस्था चेयरमैन अनिल चौरसिया, मानव अधिकार आयोग मित्र भानु दवे ने भी संबोधित किया।
वृद्धजनों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी अतिथियों ने किया। इस दौरान मनोहरसिंह लोढ़ा, अरुण खाबिया, डाॅ. एच.एन. गुप्ता, डाॅ. आर.पी. माहेश्वरी, प्रो. विवेक नागर, डाॅ. सुदामा मित्तल आदि उपस्थित थे। संचालन प्रो. पंकज तिवारी ने किया।
पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्यजन एवं विद्यार्थी।
मानव अधिकार दिवस पर ‘वृद्धजन के अधिकारी’ पुस्तक का विमोचन करते हुए अतिथिगण।