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हर लावारिस है इनका अपना, हरिद्वार जाकर करते हैं पिंडदान

7 वर्ष पहले
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पितृपक्ष में तर्पण का बेहद महत्व है। हिंदी मान्यता के अनुसार दुनिया छोड़कर जाने वाले हर व्यक्ति का तर्पण होना चाहिए। मोक्षदायिनी मां गंगा में उसकी अस्थि विसर्जित की जाना चाहिए। लावारिसों को वारिस बन विजया मित्र मंडल इस मान्यता का 13 साल से पालन कर रहा है। सालभर ऐसे लोगों की अस्थियां एकत्रित करता है जो लावारिस हैं। साल में एक बार मंडल सदस्य हरिद्वार जाते हैं और मोक्षदायिनी मां गंगा में विसर्जन कर पिंडदान करते हैं। इस मंडल के शहरवासी कायल हैं। शहरवासी उनकी इस अनूठी सेवा का बढ़ चढ़कर सहयोग करते हैं।

मार्च 2014 के दौरान निकाली गई अस्थि कलश यात्रा का फाइल फोटो।

यूं हुई शुरुआत

पानीको लेकर हुए एक आंदोलन के दौरान कुछ दोस्त एकत्रित हुए। समूह बना तो मंडल बना लिया। नाम रखा विजया मित्र मंडल। अब यह मंडल दुनिया का सबसे पुण्य कार्य कर रहा है। हर साल लावारिस अस्थियों को गंगा विसर्जन करता है। मंडल ने 2002 में इस कार्य की शुरुआत की। शहर के सभी मुक्तिधामों में रखी 36 लावारिस लोगों की अस्थियों को लेकर हरिद्वार पहुंचे और गंगा में तर्पण किया। उसके बाद यह क्रम आज तक अनवरत जारी है।

निकालते हैं अस्थि कलश यात्रा

मंडलने 13 सालों में 250 से ज्यादा लावारिस लोगों की अस्थियों का तर्पण कर मोक्ष की राह दिखाई है। जब भी वे हरिद्वार जाते हैं इसके लिए अस्थि कलश यात्रा निकालते हैं। यात्रा में शहर जुड़ जाता है। फिर विधि-विधान से तर्पण करते हैं।

यहभी विशेषता

विजयामित्र मंडल की विशेषता यह है कि अधिकांश सदस्य बचपन के मित्र है। मंडल अध्यक्ष अनिल मित्तल, सचिव मनोज लोढ़ा, उपाध्यक्ष श्याम मित्तल, सहसचिव दिनेश पड़रिया, कोषाध्यक्ष बाबूलाल गर्ग, कार्यकारिणी में सत्यनारायण शर्मा, नवीन गोयल, राजेश गाेयल सहित अन्य सदस्य है। जो बचपन से ही साथ खेले, बढ़े हुए और अब पुण्य का कार्य भी साथ ही कर रहे हैं।