‘इग्नू’ के एग्जाम सेंटर को हरी झंडी
शहरमें अब तक इंदिरा गांधी नेशनल आेपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) का स्टडी सेंटर था, मंगलवार को एग्जाम सेंटर की सौगात भी मिल गई। अब विद्यार्थियों को परीक्षा देने उदयपुर (राज.), इंदौर या उज्जैन केंद्र नहीं जाना पड़ेगा। मंदसौर पीजी कॉलेज में इग्नू के रीजनल डायरेक्टर ने कैंपस के निरीक्षण के बाद एग्जाम सेंटर का दर्जा देने की घोषणा कर दी। पीजी कॉलेज स्थित केंद्र पर अब विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन फार्म कलेक्ट कर भोपाल भेजे जाएंगे। मंदसौर केंद्र पर पहली परीक्षा दिसंबर 2014 में होगी। इससे मंदसौर सहित रतलाम और नीमच जिले के परीक्षार्थियों के लिए विकल्प मिल गया। एबीवीपी ने 2011 में ली गई डीईएलईडी परीक्षा का रिजल्ट जारी होने काे लेकर ज्ञापन सौंपा।
पीजी कॉलेज परिसर के सभागार में इग्नू के भोपाल रीजनल डायरेक्टर उमेशचंद्र पांडेय दोपहर 12.30 बजे पहुंचे। उन्होंने कॉलेज कैंपस में इग्नू का स्टडी सेंटर देखा। इसके बाद वाग्देवी कक्ष में ‘दूरस्थ शिक्षा एवं रोजगार के अवसर’ विषय पर विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने कहा इग्नू को पत्राचार के तौर पर अब पहचाना जाए, यह तो बरसों पुरानी बात हो गई। अब इसे डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन सिस्टम के तौर पर डेवलप किया है। देश में केवल यही इंटरनेशनल लेवल की यूनिवर्सिटी है। जिसमें सर्वाधिक कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों ने उनसे सवाल भी किए। इग्नू स्टडी सेंटर प्रभारी प्रो. आरएस सोनी, जैन कॉलेज प्राचार्य डॉ. क्षितिज पुरोहित, प्रो. दिनेशचंद्र गुप्ता भी मौजूद थे।
तीन साल में क्यों नहीं हो सका डिप्लोमा
एबीवीपीने इग्नू के संचालित डीईएलईडी का रिजल्ट घोषित होने को लेकर रीजनल डायरेक्टर डॉ. पांडेय को ज्ञापन दिया। विभाग संयोजक बंटी चौहान महेंद्र परिहार के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने नारेबाजी की। छात्र अंकलेश्वर गुप्ता, देवीलाल धनगर, देवेंद्र सोलंकी ने बताया डीईएलईडी कोर्स में 15 जुलाई 2011 को एडमिशन लिया था। जून 2013 में परीक्षा हुई लेकिन अब तक रिजल्ट नहीं आया। दोनाें वर्षों की फीस पूर्व में ले ली गई। 3 साल बीतने के बाद भी अब तक डिप्लोमा नहीं हो सका। संविदा शिक्षक नहीं बन पा रहे हैं। रिजनल डायरेक्टर ने कहा मुख्यालय को इस बारे में अवगत कराएंगे।
एबीवीपी ने सौंपा ज्ञापन
कॉलेज कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं कॉलेज प्रोफेसर। फोटो भास्कर
इग्नू के भोप