कान्हा जन्मे, झूमे श्रद्धालु
शहर के बंगला नंबर 55 में श्रीमदभागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इसके लिए कथा पंडाल को वृंदावनधाम की तरह सजाया गया। संगीतमय कथा में श्रद्धालु झूम उठे। कथावाचन में आचार्य दिनेश बजाज ने कहा धन-संग्रह करने से मनुष्य अभिमान, आसक्ति, प्रमाद आदि में फंस जाता है। ये पदार्थ सदा अपने पास नहीं रहते केवल बंधन रह जाता है। यदि मनुष्य संसार से माने हुए संबंध का त्याग कर दें तो वह निहाल हो जाता। मनुष्य का वास्तविक संबंध परमात्मा के साथ है जो नित्यसिद्ध है। साधक को दृढ़तापूर्वक मान लेना चाहिए कि ये उत्पन्न और नष्ट होने वाली वस्तुएं मेरी नहीं हैं। मेरे तो केवल भगवान हैं। मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों ना कोई। परमात्मा को प्राप्त किए बिना चैन से रहना दुःख की बात है। हमारा लक्ष्य परमात्मा को प्राप्त करना होना चाहिए। लक्ष्य का निर्धारण होने से उसकी विस्मृति नहीं होती। यदि हमारे हृदय में प्राणिमात्र के लिए हित का भाव रहेगा तो हमें परमात्म तत्व की प्राप्ति सुगमतापूर्वक हो जाएगी। आचार्य बजाज ने सती अनसुइया भगवान के अवतारों की कथाओं का वर्णन किया। इसके बाद धूमधाम से भगवान का जन्मोत्सव मनाया।
कथामें आज- भागवतकथा में रविवार को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं कृष्ण रुक्मिणी विवाह का उत्सव मनाया जाएगा।
कथा में उपस्थित श्रद्धालु। इनसेट-कथा में कृष्ण जन्म प्रसंग पर प्रवचन देते संत।