पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • यहां यादों में जीवित हैं बापू नेहरू और गोखले

यहां यादों में जीवित हैं बापू-नेहरू और गोखले

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गांधी, नेहरू, गोखले से लेकर, अमृता प्रीतम और मंटो तक। ये हस्तियां भले ही दुनिया में नहीं हैं लेकिन लोगों की यादों में जिंदा हैं। किताबों के माध्यम से उनके संघर्ष की गाथा जानी जा सकती है। वर्तमान से लेकर आजादी से पहले तक का है यहां हिंदी का भंडार।

यह है शहर की एक सदी पूरी करने जा रहा गांधी वाचनालय। आजादी के पहले शुरू हुआ वाचनालय दो साल बाद सौ साल का हो जाएगा। आजादी के संघर्ष का गवाह इस वाचनालय ने महात्मा गांधी की दांडी यात्रा को सहेजा वहीं देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को नीमच तक खींच लाया। गोखले के संस्मरण से लेकर अमृता प्रीतम के कहानी तक वाचनालय में है। यही नहीं प्रेमचंद के गोदान और मंटो की कहानियों को सहेज रहा है। आधुनिकता के दौर में भले ही लाइब्रेरी में कम लोग आते हैं लेकिन जो आते हैं वे शिद्दत से साहित्यकारों की दुनिया में खो जाते हैं। वाचनालय को क्षेत्र में अलग पहचान मिली हुई है।

समय के साथ करेंगे बदलाव

^यहबात सही है आधुनिकता के कारण लोगों का रुझान बदला है। पाठकों की रुचि अनुरूप लाइब्रेरी को आधुनिकता के सांचे में ढालेंगे। हाईटेक बनाने के लिए कुछ फ्रेंचाइजी से चर्चा की है। आने वाले समय में व्यवस्था में सुधार संभव है। सौरभजिंदल, अध्यक्षगांधी वाचनालय, नीमच

देखने आए थे चाचा नेहरू

1953में चाचा नेहरू लाइब्रेरी देखने आए थे। उन्हें यहां सहेजी किताबें खींच लाई। उन्होंने यहां रुककर कुछ किताबें देखी और कुछ पढ़ी भी। इसे देश की धरोहर बताया था।

दो हजार पुस्तकों का भंडार

1916में शुरू हुई लाइब्रेरी में दो हजार पुस्तकों का भंडार है। 1916 से 2014 तक की किताबें यह पुस्तकालय सहेज रहा है। महान पुरुषों की गाथाओं के अलावा कई कहानी-उपन्यास और किस्सों को सहेज कर रखा है। शुरुआती दौर में वाचनालय में 10 हजार पुस्तकें थी। समय रहते कुछ को दीमक चट कर गई लेकिन अभी भी दुर्लभ पुस्तकें यहां हैं।

अहमदाबाद से अफ्रीका तक

एक आने से लेकर 100 रुपए तक

लाइब्रेरी में मौजूद किताबों में देशभर का खजाना है। दक्षिण अफ्रीका से लेकर अहमदाबाद, सूरत, दिल्ली और मुंबई के बड़े प्रकाशन ग्रुप द्वारा प्रकाशित की गई किताबें यहां मिल जाएंगी।

लाइब्रेरी में एक आने से लेकर 100 रुपए तक की पुस्तकों का भंडार है। बापू के संघर्ष भरे जीवन की ढेरों किताबें हैं। गोपाल कृष्ण गोखले के जीवन के कई कि