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पाक सेना को खदेड़ने वाले हरदेवसिंह नहीं रहे
जिसमाटी में जन्म लिया, उसकी सेवा के लिए जीवन पर्यन्त लड़ते रहे। सीआरपीएफ में पदस्थ रहने के दौरान पाक सेना को खदेड़ा तो पंजाब में आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब दिया। ऐसे जाबांज सिपाही हरदेव सिंह राठौर को नीमच ने खो दिया। रविवार सुबह हरदेव सिंह ने अंतिम सांस ली। सोमवार को उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सम्मान से अंतिम विदाई दी।
जिले के बावल के मूलतः निवासी हरदेव सिंह राठौर ने देशभक्ति का जज्बा लिए 1955 सीआरपीएफ में भर्ती हुए। आरक्षक से निरीक्षक पद तक पहुंचे। जम्मू-कश्मीर में जहां आतंकवाद से लड़े वहीं अंडमान निकोबार में रहकर वतन की हिफाजत की। गुजरात के पाकिस्तान सीमा वाले इलाके से लेकर असम-मणिपुर में सेवाएं दी। सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर डीआईजी आरजीआर भट, आरटीसी के डीआईजी डीएस राठौर और सीटीसी के डीआईजी रावत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। अंतिमयात्रा में बड़ी संख्या में सीआरपीएफ अधिकारी सहित जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मौजूद थे।
स्व.हरदेव सिंह
दुश्मनों के किए थे दांत खट्टे
बैंड ने बजाई देशभक्ति धुन-सम्मान में झुके शस्त्र
9 अप्रैल 1965 में पाकिस्थान सेना की बिग्रेड ने गुजरात के कच्छ में भारतीय चौकी अचानक पर हमला कर दिया था। उस दौरान सीआरपीएफ की सेकंड बटालियन में तैनात हरदेव सिंह राठौर ने दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। सीआरपीएफ ने पाक सेना को पीछे खदेड़ दिया था। इस दिन को सीआरपीएफ शौर्य दिवस के रूप में मनाती है। पंजाब में पनपते आतंकवाद का हरदेवसिंह ने डटकर मुकाबला किया। 1984 में जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। उनकी ड्यूटी पंजाब में लगाई। इस दौरान भी उन्होंने बखूबी ड्यूटी का निर्वहन किया।
कनावटी मुक्तिधाम पर अंतिम विदाई के वक्त सीआरपीएफ के बैंड ने देशभक्ति धुन बजाई। गॉड ऑफ ऑनर देने वाले जवानों ने सम्मान के साथ शस्त्रों को झुका लिया। सीआरपीएफ के अधिकारियों ने उन्हें अंतिम सलाम कर उनकी जांबाजी को याद किया। मुखाग्नि बडे़ बेटे असिस्टेंट कमांडेंट ब्रजमोहन राठौर ने दी। मुक्तिधाम पर शोकसभा हुई। इसमें भारतीय सुभाष सेना जावद, भारतीय पेंशनर संघ, पेंशन संघ कनावटी सहित अनेक संगठनों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कनावटी मुक्तिधाम में जांबाज सिपाही रहे हरदेव सिंह राठौर को गार्ड ऑफ ऑनर देते सीआरपीएफ के जवान।