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5 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ेगी प्रॉपर्टी की गाइड लाइन

5 वर्ष पहले
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जमीनों का सरकारी मूल्य निर्धारित करने के लिए पंजीयन विभाग ने गाइड लाइन तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। इस बार गाइड लाइन में 5 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि के आसार नहीं है। इसकी वजह 2014-15 के मुकाबले 2015-16 (अब तक) में कम राजस्व प्राप्त होना है। कई इलाकों में सरकारी गाइड लाइन बाजार मूल्य से काफी ज्यादा होने से भी इस बार राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

जिला पंजीयक कार्यालय में 2016-17 के लिए प्रॉपर्टी गाइड लाइन तैयार करने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। 1 अप्रैल 2016 से नई गाइड लाइन लागू होगी। इसके लिए जिले के सभी उप पंजीयक कार्यालय सहित तीनों एसडीएम, तहसीलदाराें, नायब तहसीलदार व पटवारियों को डाटा तैयार करने के लिए पत्र जारी हो चुके हैं। गाइड लाइन को लेकर इसी सप्ताह उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक भी होना है। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति की बैठक होगी। इसमें प्रस्तावित गाइड लाइन पर विचार-विमर्श होगा। इसके बाद अगली बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस पर गाइड लाइन में 5 फीसदी से ज्यादा वृद्धि नहीं की जाएगी। इस बार उसी क्षेत्र में जमीनों की कीमत बढ़ाई जाएगी जहां बाजार मूल्य से काफी कम है।

पिछले साल से 2262 रजिस्ट्री कम
जिले में पिछले वर्ष गाइड लाइन में 8 से 50 फीसदी तक की वृद्धि की गई थी। इसका असर जिला पंजीयन विभाग को प्राप्त होने वाले राजस्व पर पड़ा। विभाग के अनुसार 1 अप्रैल 2014 से 31 जनवरी 2015 तक 8468 रजिस्ट्रियां हुईं थी। इससे 34 कराेड़ 17 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके मुकाबले 1 अप्रैल 2015 से 31 जनवरी 2016 तक सिर्फ 6204 रजिस्ट्रियां ही हो सकी हैं। इससे शासन को स्टाम्प ड्यूटी के रूप में 30 करोड़ 2 लाख रुपए ही राजस्व मिला है। यानी 2262 रजिस्ट्री और 4 करोड़ 15 लाख रुपए राजस्व कम प्राप्त हुआ। पूरे वित्त वर्ष से तुलना करें तो इस साल अब तक 3189 रजिस्ट्री कम रहीं और राजस्व भी 9 करोड़ 33 लाख रुपए कम प्राप्त हुआ। मौजूदा स्थित को देखते हुए नहीं लगता कि 31 मार्च 2016 तक यह कमी पूरी हो सकेगी। यही वजह है कि विभाग ने उप पंजीयक कार्यालयों को 5 फीसदी से ज्यादा गाइड लाइन नहीं बढ़ने के निर्देश दिए हैं।

व्यवहारिक बनाने के लिए उठ रही मांग- रियल एस्टेट से अभी से गाइड लाइन को व्यवहारिक बनाने को लेकर मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रॉपर्टी कारोबारियों का तर्क है कि पिछले वर्ष कई क्षेत्रों में जमीन के दाम जरूरत से ज्यादा बढ़ा दिए गए थे। बाजार में कई स्थानों पर सरकारी गाइड लाइन बाजार मूल्य से काफी ज्यादा है। ऐसे में खरीदार को वास्तविक कीमत से ज्यादा पर स्टाम्प ड्यूटी चुकाना पड़ रही है।

ज्यादा गाइड लाइन नहीं बढ़ेगी-
इस बार ज्यादा गाइड लाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। जहां ज्यादा आवश्यक होगी, वहीं बढ़ाएंगे। जो कमियां पिछली बार रह गई थीं, उन्हें दूर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। उप मूल्यांकन समिति की बैठक इसी सप्ताह होगी। मंजुलता पटेल, जिला पंजीयक

यहां गाइड लाइन से भी कम हैं दाम
क्षेत्र गाइड लाइन में रेट बाजार में रेट

स्कीम नंबर36ए 15 हजार500 रुपए वर्ग मीटर 12 से 14 हजार रुपए

विकास नगर 24 हजार रुपए वर्ग मीटर 18 से 20 हजार रुपए

कर्मचारी कॉलोनी 7 हजार 500रुपए वर्ग मीटर 5 हजार रुपए

कनावटी 30 लाख रुपए प्रति बीघा 19 से 22 लाख रुपए

(मेन रोड से लगी)

नोट-जानकारी गाइड लाइन और बाजार रेट के अनुसार।

कमियां सुधारने में जुटा विभाग
पिछले साल गाइड लाइन ऑनलाइन करने के दौरान कई कमियां रह गई थीं। वे सालभर के दौरान सामने आईं। इसमें सबसे ज्यादा गलतियां मात्राओं व क्षेत्र के नाम में आईं। अंकाें में भी गलतियां होने से कहीं गाइड लाइन की दर कम तो कहीं ज्यादा है। इसी तरह कई जगह क्षेत्रफल ही गलत लिखा है। इसके अलावा कॉलोनियों, क्षेत्रों के नाम, क्रम ऊपर-नीचे होना, कई क्षेत्रों के नाम ही नहीं है तो कुछ के डबल प्रिंट हैं। विभाग इन गलतियों को सुधारने पर ज्यादा जोर दे रहा है।

साल दर साल घट रहा राजस्व
वर्ष रजिस्ट्री राजस्व (रु.)

2011-12 9,935 27.42 करोड़

2012-13 10,005 30.10 करोड़

2013-14 9,467 30.50 करोड़

2014-15 9,393 39.35 करोड़

2015-16 6,204 30.02 करोड़ (31 जनवरी 2016 तक)

ऐसे बनती है गाइड लाइन
प्रस्तावित गाइड लाइन उप पंजीयक तैयार करते हैं। वे सालभर में शहर में हुए जमीनों के सौदों की जानकारी जुटाते हैं कि किन इलाकों में कितने सौदे हुए और किस भाव पर हुए। इस आधार पर जमीन के रेट तैयार किए जाते हैं। जहां ज्यादा डिमांड रहती है, वहां के दाम ज्यादा बढ़ाए जाते हैं। प्रस्तावित गाइड लाइन बनाकर इसे जिला मूल्यांकन समिति में रखा जाता है। इस आधार पर ही बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया जाता है। जिला मूल्यांकन समिति इस प्रस्तावित नई गाइड लाइन पर मुहर लगाने के बाद भोपाल आईजी रजिस्ट्रेशन कार्यालय को भेजती है। जहां से स्वीकृति के बाद 1 अप्रैल से गाइड लाइन लागू हो जाती है।

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