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अब नन्हे-मुन्नों के लिए कहानियों की बरखा

6 वर्ष पहले
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सरकारीस्कूलों के पहली-दूसरी के बच्चों को कहानियों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इसके लिए एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग) ने बरखा नाम से 40 किताबों की सीरिज तैयार की है। ये सर्व शिक्षा अभियान के तहत नोडल सेंटरों को भिजवाई गई हैं। यहां से जल्दी ही प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में 40-40 किताबों के सेट भेजे जाएंगे।

बरखा सीरिज की किताबों में पीपनी, गिल्ली-डंडा, चाय, गेहूं, तोसिया का सपना, मीठे-मीठे गुलगुले जैसी तमाम कहानियों का गुलदस्ता है। सभी कहानियों को चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया है। इन्हें चार स्तरों पर पांच कथा वस्तुओं में विस्तारित किया गया है। कहानियों के माध्यम से पढ़ाने के पीछे उद्देश्य बच्चों को अपने स्तर पर पढ़ना सिखाना है। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जाग्रत होगी।

खुदउठानी पड़ेगी किताब- बच्चोंको बरखा किताबों से व्यवहारिक ज्ञान मिलेगा। इन्हें बच्चों को दिखाने के बाद नियत स्थान पर रख जिया जाएगा। वहां से बच्चों को खुद ही पहचान कर किताब उठाना पड़ेगी।

पढ़ना-पढ़ाना होगा आसान

^बच्चोंमें शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की दिशा में यह पहल की गई है। इन किताबों के माध्यम से शिक्षकों को पढ़ाने में आसान होगा। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा हो गई। रामराजसिकरवार, डीपीसी