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रैफर मरीज को स्वाइन फ्लू की आशंका से अस्पताल में हड़कंप

6 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मरीज के आने से शनिवार को हड़कंप मच गया। स्वाइन फ्लू की आशंका के चलते डॉक्टर से लेकर स्टाफ तक सभी सर्जिकल मास्क पहने दिखे। अन्य मरीज भी काफी भयभीत नजर आए।

इंदौर भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलाें में स्वाइन फ्लू अपना दायरा बढ़ाता जा रहा है। इससे कई मौतें भी हो चुकी हैं। शनिवार को डीकेन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से यशवंत पिता रतनलाल (20) निवासी नई आबादी डीकेन जिला अस्पताल रैफर किया गया। बुखार सीने में दर्द होने से उसे अस्पताल लाया गया।

मरीज को स्वाइन फ्लू होने की आशंका अस्पताल में हड़कंप मच गया। डॉक्टरों स्टाफ ने एहतियात के तौर पर सर्जिकल मास्क पहनकर इलाज किया। डॉ. एनके गोयल, डॉ. डी प्रसाद ने परीक्षण कर ब्लड के सैंपल की जिला अस्पताल में जांच हुई। संदिग्ध को अलग वार्ड में रखकर ब्लड सहित अन्य रुटीन जांचें की गईं। बेहोशी के कारण उसके स्वाब का सैपल नहीं लिया जा सका। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने यशवंत में स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिलने की बात कही है। उनका कहना है कि उसे स्वाइन फ्लू नहीं हो सकता।

स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज की जांच करते डॉक्टर स्टाफ।

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारी है। यह ए-टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है। यह वायरस हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश करता है। दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह फैल सकता है। इसका संक्रमण पीसीआर टेस्ट के माध्यम से पता चल सकता है। इसके वायरस में चिड़ियों, सूअरों इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटेरियल भी रहता है। स्वाइन फ्लू होने के शुरुआती 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। इसका इलाज कम से पांच दिन चलता है। इसमें मरीज को टेमीफ्लू टेबलेट दी जाती है।

यहभी अपनाएं- आयुर्वेदाचार्योंके अनुसार घरेलू नुस्खे से स्वाइन फ्लू का संक्रमण रोका जा सकता है। इसके लिए कपूर, तुलसी इलायची पीसकर मिला लें। यह मिश्रण हमेशा पास रखें थोड़े-थोड़े अंतराल पर सूंघते रहें।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

{तेज बुखार। { ज्यादा ठंड लगना। { गला खराब होना। {मांसपेशियों में दर्द। { तेज सिरदर्द होना। { खांसी कमजोरी।

ऐसेहोता है संक्रमण

{संक्रमित के खांसने-छींकने से। { संक्रमत द्वारा उपयोग उपकरण, बर्तन आदि से। { संक्रमित से हाथ मिलाने संपर्क में आने से।

यहसावधानी बरतें

{बार-बार साबुन से हाथ धोएं। { साबुन या सॉल्यूशन वायरस खात्म करने वाला हो। { नाक मुंह पर मास्क लगाएं।

इलाजकर रहे

^यशवंतको परिजन बेहोशी की हालत में लाए। प्राथमिक जांच में स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिले। डॉ.बीएल बोरीवाल, सिविल सर्जन- जिला अस्पताल

स्वाइन फ्लू नहीं

डॉ.गोयल ने बताया यशवंत को बुखार, मलेरिया, चेस्ट इंफेक्शन है। स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिले। वह ऐसी किसी जगह नहीं गया जहां वह स्वाइन फ्लू संक्रमित रोगी के संपर्क में आता। उसे स्वाइन फ्लू नहीं हो सकता।