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‘तप, ध्यान से होता आत्मा का कल्याण’

4 वर्ष पहले
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नीमच | एकाग्रचित्त मन से भक्ति तप ध्यान करें तो आत्मा का कल्याण हो सकता है। धर्म सत्संग प्रवचन में मन को आनंद मिले तो सत्य, अहिंसा,परमार्थ के पुण्य को जीवन में आत्मसात करेंगे तभी आत्मा का कल्याण होगा। यह बात जिनवल्लभ विजय महाराज ने आराधना भवन में चातुर्मास धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा यम, नियम, संयत यदि नियमित हो तो मुक्ति हो जाती है धर्म का नियमित पालन करें। स्वरूप चाहे कोई भी हो लक्ष्य एक हो तो परमात्मा फल देता है। वाणी में संयम रखे तो जीवन सफल होगा। मानव को संयम पालन कर पुण्य कर्म सत्य, अहिंसा को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। क्योंकि मानव सुख तो चाहता है लेकिन दूसरों को दु:ख देना नहीं छोड़ता है। दूसरों को सुख बांटे तभी स्वयं को सुख मिलेगा। इसलिए दान देने में भी ध्यान रखें। प्रभु की भक्ति मन से करें, धर्मग्रंथों का पालन करें और जन-जन का कल्याण करें तभी प्रभु की कृपा मिलेगी। प्रवचन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ ले रहे हैं।

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