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कृष्ण-सुदामा मिलन प्रसंग पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

7 वर्ष पहले
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{बंगला नं. 55 में चल रही सात दिनी श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम आज

सिटीरिपोर्टर | नीमच

अरेद्वार पालो कन्हैया से कह दो दर पर सुदामा करीब गया है। ऐसे ही भजनों पर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। अवसर का भागवत कथा में कृष्ण-सुदामा मिलन प्रसंग का। बंगला नंबर 55 में चल रही भागवत कथा का सोमवार को विश्राम हुआ। कथा के अंतिम प्रसंग पर क्षेत्र के बालक-बालिकाओं ने कृष्ण-सुदामा और द्वारपाल के सुंदर अभिनय की प्रस्तुति दी।

कथा के दौरान भगवताचार्य दिनेश बजाज ने कहा भगवान का अनुभव होने के बाद फिर उनसे एक क्षण अलग नहीं हो सकते। शरीर संसार से माना हुआ संबंध छूटते ही ज्यों के त्यों विद्यमान परमात्मा का अनुभव हो जाता है। संसार में जो आकर्षण है वह आसक्ति कहलाती है। आकर्षण भगवान से हो जाए तो भक्ति या प्रेम कहते हैं। धन में, भोगों में, परिवार आदि में जो हमारा लगाव है वह भगवान की तरफ होते ही भक्ति हो जाती है। संसार में ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है जिसमें जीव का कल्याण हो सकता हो। प्रत्येक परिस्थिति में परमात्मा समान रूप में विद्यामान है।

प्रत्येक परिस्थिति में परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है। भगवताचार्य द्वारा कृष्ण-सुदामा मिलन की सुंदर कथा का वर्णन किया। संगीतमय कथा में श्रद्धालु भजनों पर खूब झूमे। सात दिनी कथा के विश्राम पर मंगलवार को हवन-यज्ञ के साथ पूर्णाहुति होगी। सुबह 9 बजे यज्ञ शुरू होगा। उसके बाद कन्या पूजन, ब्राहम्ण भोज और फिर भंडारा होगा।

कृष्ण-सुदामा प्रसंग में सुदामा के चरण धोते राधा-कृष्ण।

कथा श्रवण करती महिलाएं।