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हमें हिंदी पर गर्व करने की जरूरत

7 वर्ष पहले
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हिन्दी का भविष्य उज्जवल है। देश में सबसे अधिक समाचार पत्र हिन्दी भाषा में है। इसके अलावा टेलीविजन हिन्दी भाषा को बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। यह बात हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश चौहान ने कहीं। सोमवार को स्वामी विवेकानंद महािवद्यालय में हिन्दी दिवस मनाया। प्राचार्य डॉ. अशोका श्रीवास्तव, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. संजय जोशी ने विचार व्यक्त किए। संचालन हिंदी संकाय के छात्र विमल रावत, भावना कदम ने किया। डाॅ.ए जायसवाल सहित प्राध्यापक एवं विद्यार्थीगण मौजूद थे।

राजभाषा का संदेश पढ़ा

सीआरपीएफस्थित ग्रुप केंद्र के तत्वावधान में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया। स्टेशन स्तर पर हिंदी समारोह में मुख्य अतिथि आईआईजी सतपाल रावत थे। उन्होंने राजभाषा का संदेश पढ़कर सुनाया। सीआरपीएफ के सभी कार्यालयों में 1 सितंबर से 15 सितंबर तक आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले 84 प्रतियोगिताओं को प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। नकद पुरस्कारों की घोषणा की।

उपस्थित नागरिकगण। इनसेट-संबोधित करते समाजसेवी संजय पटेल।

हिंदी का भविष्य उज्जवल

सिटी रिपोर्टर | नीमच

जिसतरह हिंदी भाषियों में असुरक्षा की भावना है यह सही नहीं। आज मैं जहां हूं उसका श्रेय हिंदी को है। हिंदी का जितना मातम हिन्दी वालों ने किया है उतनी दयनीय दशा हिंदी की नहीं है। मुझे भाषा का संस्कार देने वाली और रोजी रोटी देने वाली हिंदी को प्रणाम करता हूं। यह बात इंदौर से आए समाजसेवी साहित्यकार संजय नरहरि पटेल ने कही। वे हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यक संस्था ‘कृति’ के कार्यक्रम में बोल रहे थे। ज्ञान मंदिर महाविद्यालय में हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा हम दूरदर्शन पर विनोद दुआ, अाज तक पर पुण्य प्रसून वाजपेयी से हिंदी सुनते हैं। हमें अच्छा लगता है। आज कम्प्यूटर या मोबाइल पर हिंदी की उपलब्धता है। कहीं कहीं हमें यह महसूस करना होगा कि हिन्दी कभी कमतर भाषा नहीं रही। हमने मजरूह सुल्तानपुरी, निदा फाजली, कैफी आजमी, हसरत जयपुरी जैसे उर्दू शायर को फिल्मों में सुना, उन्हें उर्दू साहित्य में पर्याप्त सम्मान मिला। परंतु हमने शैलेन्द्र, नीरज जैसे कवियों को केवल फिल्मी गीतकार समझकर रख दिया। इन्हें कभी साहित्यकार होने का दर्जा नहीं दिया। जावेद अख्तर हिंदी उर्दू दोनों जगह सम्मान पाते हैं। अध्यक्षता कर