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आत्मविश्वास व जागृति बिन कल्याण संभव नहीं

5 वर्ष पहले
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आत्मविश्वास और जागृति बिना मानव जीवन सार्थक सिद्ध नहीं होता। मन के अंदर से जब मिथ्या तत्व छूटेगा तभी मानव का कल्याण होगा। आत्मविश्वास व जागृति बिना मानव जीवन सार्थक नहीं है। इसिलए हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं तभी जीवन में सुख-शांति का वास होगा। रात के भोजन को त्याग करें।

यह बात मुनि प्रणम्यसागर ने कही। वे शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा समय वह अच्छा होता है जिसमें अच्छे भावों से अच्छा कार्य किया जाता है। जब हम स्थिर नहीं हैं तो वस्तु कैसे स्थिर रह सकती है। मानव भ्रमों के कारण सही काल की गणना नहीं कर सकता। सूर्य, चंद्रमा, ग्रह-नक्षत्र अपनी गति से चल रहे हैं। नक्षत्र से मानव जीवन पर प्रतिफल का अनुमान लगता है। जैन दर्शन के अनुसार 88 विज्ञान में 22 ज्योतिष में 9 ग्रह होते हैं। हर ग्रह में जन्मे बालक के लक्ष्य तय हैं। उसके अनुसार ही मानव जीवन चले, यह तय नहीं है। एक ही समय में जन्मे अलग-अलग मनुष्य भी अलग-अलग होते हैं। सूर्य व चंद्र अनुसार दिन-रात की गति तय होती है।

मुनिश्री ने कहा जिनेंद्र भगवान की आराधना से सभी ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। भगवान की पूजा से पाप कर्म स्वतः जल जाते हैं और दोष नष्ट हो जाते हैं।

प्रणम्यसागरजी ने कहा
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