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बंद खदानों से कोयला चोरी, खतरे में जान

5 वर्ष पहले
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वेस्टर्न कोल फील्ड्स की बंद खदानों से कोयला चोरी करने वाला गिरोह सक्रिय है। खदानों से ट्रैक्टर और ट्राॅलियों से कोयला चोरी हो रहा है। खास यह है दोनों प्रमुख कंपनियों के बैरियरों से बिना रोक-टोक कोयला निकल रहा है। आस-पास के क्षेत्र के ईंट भट्‌टों को कोयला महंगे दामों पर सप्लाई भी हो रहा है।

पाथाखेड़ा क्षेत्र में बंद पड़ी खदानों से कोयला निकालने का काम किया जा रहा है। इन्हें आस-पास के ईंट-भट्‌टों को सप्लाई किया जा रहा है। खतरनाक बात यह है खदानों के बंद मुहानों (खदानों के प्रवेश द्वार) को खोदकर इससे कोयला निकाला जा रहा है। सुरक्षा विभागों की मिली भगत से कोयला माफियाओं का व्यवसाय फल फूल रहा है। ज्यादातर कोयले के ट्रैक्टर सारनी के एबी टाइप कॉलोनी होकर पीके 2 खदान पहुंचते हैं। यहां से कोयला भरकर इसी रास्ते आते हैं। जबकि गेट नं. 1 और सीएचपी के आसपास वाहनों की चैकिंग होती है। दूसरी ओर तवा-1 खदान के पास से भी कोयले अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यहां भी पानी के साथ बहकर आने वाले कोयले को खोदकर ट्रैक्टर ट्राॅलियों के से भेजा जा रहा है।

चूरी भी हो रही चाेरी

पॉवर प्लांट से निकलने वाली चूरी का भी ठेका नहीं होने से इसे प्लांट के पीछे वेस्ट फेका जा रहा है। जले हुए कोयले को फेंक दिया जाता है। नियमानुसार इसका टेंडर होता है। लेकिन मामला फिलहाल विवादों में है। इस वजह से लगातार कोयला की चूरी की कालाबाजारी जारी है।

फोटो- 1

सारनी के पाथाखेड़ा की पीके 2 खदान के पास से कोयला चोरी हो रहा है।

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