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सारनी के हिस्से का कोयला खंडवा को, यहां बढ़ेगी उत्पादन की लागत

5 वर्ष पहले
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सतपुड़ा का परफारमेंस होगा प्रभावित

भास्कर सवांददाता | सारनी

सतपुड़ा पॉवर प्लांट के हिस्से के डब्ल्यूसीएल के कोयले को खंडवा भेजा जा रहा है। वहीं सारनी के लिए एसईसीएल की खदानों का कोयला मंगाया जा रहा है। कंपनी की इस नई पॉलिसी से खंडवा को तो आसानी से कोयला मिल जाएगा, लेकिन सारनी को ये महंगा पड़ेगा। इसके नुकसान आने वाले दिनों में सामने आएंगे। प्रति इकाई उत्पादन कास्ट बढ़ जाएगी। पहले ही परफारमेंस खराब होने के कारण सतपुड़ा को एनटीपीसी को सौंपने की रणनीति बनाई रही है।

एसईसीएल की खदानों से खंडवा कोयला पहुंचाने में ज्यादा कास्ट आ रही थी। इसलिए सारनी के हिस्से का कोयला खंडवा भेजा जा रहा है। खंडवा में संत सिंगाजी महाराज प्लांट की स्थापना करने के बाद भी यहां कोयले का कोई लिंकेज नहीं था। इस परेशानी को देखते हुए पिछले साल पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने सारनी में एक बैठक रखी। इसमें डब्ल्यूसीएल के सीएमडी और पॉवर जनरेटिंग कंपनी के एमडी के बीच बैठक हुई। बैठक में तय हुआ सारनी को मिलने वाला डब्ल्यूसीएल का सारा कोयला खंडवा प्लांट को दिया जाएगा। इसके अलावा एसईसीएल के कोयले को सारनी प्लांट लाया जाएगा। सारनी में पेंच, कन्हान और पाथाखेड़ा क्षेत्र के अलावा नागपुर से काफी संख्या में कोयला यहां पहुंचता है। ये सारा कोयला अब करीब खंडवा जाने लगा है। स्थानीय खदानों को छोड़कर सारा कोयला खंडवा भेजा जा रहा है। सारनी के लिए एसईसीएल की कुशमुुंडा, नौरोजाबाद, चिरमिरी खदानों से कोयला लाया जा रहा है। दूर से कोयला आएगा तो परिवहन की लागत भी बढ़ेगी। इससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ेगी। एसईसीएल की खदानों से यानी छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से सारनी कोयला आएगा। दिक्कत यह है कंपनी ने कागजों पर कोयले के परिवहन को कम करने के लिए यहां का कोयला वहां भेज दिया है। कास्टिंग में कोई कमी नहीं आई है। केवल सतपुड़ा का परफारमेंस बिगड़ेगा।

पेंच में बनना था प्लांट, पेचीदगी में अटका काम

छिंदवाड़ा जिले के पेंच क्षेत्र में वर्ष 1980 से 87 के बीच विद्युत मंडल (तत्कालीन समय में) ने प्लांट बनाने की तैयारी की थी। कोयला पानी की पर्याप्त आपूर्ति को देखते हुए इस परियोजना को पारित किया था, लेकिन राज्य सरकारों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। कंपनी भी इसे भूल गई। इसके बाद खंडवा के बीड़ में ऐसी जगह पॉवर प्लांट स्थापित किया, जहां कोयला था ही नहीं। यहां कोयला ले जाने के लिए 350 किमी दूर का सफर तय करना पड़ रहा है। जबकि सारनी और पेंच में कोयला महज 2 किमी दूर से ही मिल जाता।

यूनिटों से बिजली उत्पादन लागत बढ़ेगी

सतपुड़ा पॉवर प्लांट की इकाइयों की लागत पहले से ही ज्यादा है। प्लांट की 6 से 9 तक की इकाइयों से उत्पादित होने वाली बिजली की प्रति यूनिट लागत करीब 2.49 रुपए है। जबकि 10 और 11 नंबर इकाई से पैदा होने वाली बिजली की लागत करीब 2.14 रुपए है। बिरसिंपुर की इकाइयों से उत्पादित बिजली की लागत सारनी प्लांट से कहीं ज्यादा है। यहां की लागत करीब 2.77 रुपए प्रति यूनिट है। अब सारनी में बाहर से कोयला आएगा तो लागत और बढ़ने की आशंका है। इससे सतपुड़ा का परफारमेंस और ज्यादा खराब होगा।

खंडवा भेज रहे हैं कोयला
कंपनी में उच्च स्तर पर करार हुआ था। इसी आधार पर कोयला खंडवा भेजा जा रहा है। सीएचपी के एसई के अनुसार सारनी के लिए एसईसीएल का कोयला आ रहा है। कोयला परिवहन की कास्ट ज्यादा होने के कारण ऐसा किया है। फिलहाल सीएचपी में 6 लाख मीट्रिक टन कोयला है। शशिकांत मालवीया, पीआरओ पॉवर प्लांट सारनी

ये भी खास
बेकिंग डाउन से भी नहीं कर पाई इकाइयां परफारमेंस

प्लांट की 10 और 11 नंबर इकाई में नहीं फीड किया जा रहा विदेशी कोयला।

प्लांट की 11 नंबर इकाई का जनरेटर ट्रांसफार्मर आने के बाद भी नहीं शुरू हुआ उत्पादन।

प्लांट की 6 से 10 तक सभी इकाइयां दे रही हैं उत्पादन।

परफारमेंस को लेकर जूझ रहा सारनी प्लांट
सतपुड़ा पॉवर प्लांट इकाइयों के लगातार बंद रहने और बेकिंग डाउन के कारण अपना पूरा परफारमेंस नहीं दिखा पाया है। प्लांट की 9 नंबर इकाई का जनरेटर ट्रांसफार्मर 23 मई को जल गया था। इसके बाद 25 जुलाई को 11 नंबर इकाई का जनरेटर ट्रांसफार्मर भी जल गया। इस बीच नवंबर में 9 नंबर इकाई को शुरू किया। प्रतिदिन डीसी का 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इसी तरह 11 नंबर इकाई की डीसी का करीब 89 लाख रोजाना का नुकसान हो रहा है।

सारनी के सतपुड़ा प्लांट के सीएचपी में एसईसीएल का कोयला लाया जा रहा है।

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