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पचमढ़ी के शिव मंदिरों में पूजा करने उमड़े श्रद्धालु

6 वर्ष पहले
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पचमढ़ी महाशिवरात्रि में 15 से बढ़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

कल्चरलरिपोर्टर| पिपरिया

भगवानशंकर के दर्शन की अभिलाषा लेकर पचमढ़ी पहुंचने वाले भक्त उन्हें त्रिशूल भेंट कर रहे हैं। श्रद्धालु चौरागढ़ मंदिर में विराजमान भगवान को त्रिशूल भेंट करते हैं। कई श्रद्धालु त्रिशूल भेंट करने के बाद इन्हें आशीर्वाद स्वरूप अपने घरों और मंदिरों में लगाते हैं। चौरागढ़ मंदिर पहाड़ी पर हजारों की तादाद में छोटे-बड़े त्रिशूल रखे गए हैं।

गौरतलब है कि पचमढ़ी में महाशिव रात्रि मेले में महाराष्ट्र और विदर्भ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे हैं। पचमढ़ी में करीब 6 हजार श्रद्धालु होंगे। पचमढ़ी के चौरागढ़, महादेव, जटाशंकर मंदिरों में भगवान के दर्शन करने श्रद्धालुओं की कतारें लगीं हैं। यहां वादियों में भगवान शंकर के जयकारे गूंज रहे हैं। 15 फरवरी से पचमढ़ी में भीड़ में इजाफा हो जाएगा। महादेव मेला समिति ने इस बार श्रद्धालुओं से छोटे त्रिशूल लाने के लिए आग्रह किया है। पर्ची काटने के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर से ही त्रिशूल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। श्रद्धालु परंपरानुसार भगवान शंकर को त्रिशूल भेंट करते हैं।

सिवनी छपारा से आए श्रद्धालु अजय सनकस और उनके 25 सहयोगी भगवान शंकर को भेंट करने के लिए 23 फुट ऊंचा और करीब 151 किलो वजनी त्रिशूल लेकर पचमढ़ी पहुंचे हैं। सभी श्रद्धालु त्रिशूल लेकर मंदिर की 1300 सीढ़ियां चढ़े। भगवान को त्रिशूल भेंट कर आशीर्वाद लिया। अब इस त्रिशूल को सिवनी के माता मंदिर में वे स्थापित करेंगे। चौरागढ़ मंदिर की पहाड़ी करीब साढ़े तीन हजार फुट ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए महादेव मंदिर से कुछ पैदल दूरी तय करने के बाद सीढ़ियां चढ़ना पड़ता है। छिंदवाड़ा तरफ के पहाड़ी हिस्से से भी श्रद्धालु चौरागढ़ मंदिर तक पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर्व 17 फरवरी को है। इस दिन भगवान शंकर के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व होता है। मेले की व्यवस्थाएं महादेव मेला समिति करवा रही है। श्रद्धालुओं को महादेव मंदिर तक छोड़ने के लिए टैक्सियां चल रहीं हैं। टैक्सी का किराया मेला समिति ने तय कर दिया है। अास्था और विश्वास से दूर-दूर के श्रद्धालु आकर भगवान से अपनी मन्नतें मांग रहे हैं। श्रद्धालु जय बानखेड़े ने बताया कि वे हर साल दर्शन करने के लिए पचमढ़ी आते हैं।

जटाशंकर मंदिर- यहपचमढ़ी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पवित्र गुफा है। मंदिर में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बने हुए हैं। यहां वजनी चट्टान पहाड़ी के बीच लटक रही है। यह भी दर्शनीय है। यहां तक पहुंचने के लिए कुछ दूर पैदल चलना पड़ता है।

चौरागढ़मंदिर- मंदिरजाने के लिए पहले पचमढ़ी से 10 किलोमीटर का रास्ता वाहन से तय करना पड़ता है। इसके बाद मंदिर की पहाड़ी तक पहुंचने के लिए करीब 1300 सीढ़ियां चढ़ना पड़ता है। यह सिद्ध मंदिर ऊंची पहाड़ी पर है।

महादेवमंदिर- हादेवमंदिर पचमढ़ी से करीब 10 किलोमीटर दूर है। यहां एक पवित्र गुफा है। वहां भगवान शंकर के शिव लिंग हैं।

गुप्तमहादेवमंदिर- महादेवमंदिर के गुप्त महादेव मंदिर है करीब 50 फुट लंबी और 8 फुट ऊंची गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग बना हुआ है।

पिपरिया। भगवान शंकर को त्रिशूल चढ़ाने के लिए पहुंचे श्रद्धालु, मंदिर परिसर में जमा त्रिशूल।