पुलिस की मौजूदगी में लगी धान की बोलियां
कार्यालय संवाददाता| पिपरिया
कृषिउपज मंडी में गुरुवार को धान बोली के दौरान विवाद की स्थितियां बनीं। मंडी प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी। लगभग आधे घंटे तक दो पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में धान के लिए व्यापारियों ने बोलीं लगाई। किसानाें का कहना है कि जब बाजार में चांवल के रेट वही हैं, लेकिन धान के रेट कम मिल रहे हैं। किसानों ने कहा कि धान का समर्थन मूल्य 1360 रुपए है। इसलिए मंडी में इससे नीचे बोली नहीं लगना चाहिए। दरअसल, कुछ किसान धान बेचने चाहते थे। जबकि कुछ रेट देखकर नीलामी के पक्ष में नहीं थे। रेटों से असंतुष्ट किसान मंडी सचिव ऋतु गढ़वाल के पास पहुंचे। उन्हें अपनी समस्याएं बताईं। किसानों की भीड़ देख मंडी प्रशासन ने पुलिस का सूचना दी। बुधवार को व्यापारी धान को 1 हजार से 1200 रुपए में खरीद रहे थे। भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष प्रशांत पाठक का कहना है कि धान के रेट कम होने के कारण व्यापारी भंडारण कर रहे हैं। ताकि अगले साल रेट बढ़ने पर मुनाफा कमाया जा सके।
क्योंकि दामों की मार झेल चुका किसान अगली बार धान कम लगाएगा। ऐसे में व्यापारियों और बिचौलियों के वारे-न्यारे हो जाएंगे। धान खरीदी में कई लोग पैसा लगा रहे हैं। ताकि मुनाफा कमाया जा सके। किसान धान मामले में जमकर लुट रहा है। किसानों की लागत निकलना मुश्किल हाे रहा है। मंडी सचिव ऋतु गढ़वाल ने कहा कि किसानों को समझाईश देकर संतुष्ट किया गया है। मंडी शुल्क छूट के संबंध में लिखित अादेश प्राप्त होने पर उन्हें लागू किया जाएगा। कृषि उपज मंडी में करीब 35 हजार क्विंटल धान पड़ी है।
पिपरिया। कृषि मंडी में धान नीलामी के दौरान पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे।
अप्रमाणित बीज मामले में सख्त कार्रवाई हो: पाठक
भारतीयकिसान संघ के जिला उपाध्यक्ष पाठक का कहना है कि तमाम नियमों के बीच अप्रमाणित बीज और खाद बिकते हैं। पिछले दिनों शहर में घटिया बीज का मामला सामने आया था। इस मामले में रिपोर्ट आने के बाद संबंधित दुकानदारों के लाइसेंस निरस्ती के साथ उचित कार्रवाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत से बीज बनाया जाता है। प्रमाणीकरण प्रक्रिया केवल नाम की है। खाद की अभी जरूरत है इसलिए किसानों को खाद की उपलब्धता हो। शासन-प्रशासन ऐसे इंतजाम करें।
स्थिति|व्यापारी धान को 1 हजार से 1200 रुपए में खरीद रहे थे