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टैक्स में छूट मिली, फिर भी नहीं बढ़े धान के रेट
दूसरे दिन भी हुई बारिश, फिर भीगी धान
{शनिवार देर रात 3 बजे से शुरू हुई बारिश रविवार सुबह तक चली
कार्यालयसंवाददाता|पिपरिया
बीतीरात और रविवार सुबह जोरदार बारिश हुई। जिसका असर कृषि मंडी में देखने को मिला। कृषि उपज मंडी में लगातार दूसरे दिन बारिश के कारण किसानों की धान की फसल गीली हो गई। किसानों ने धान के ढेरों पर पॉलीथिन डालकर उसे जैसे-तैसे बचाया। बारिश थमने के बाद किसानों ने धान को फैलाकर सुखाने का प्रयास किया। किसानों को चिंता है कि वैसे ही धान के रेट कम हैं। धान में नमी आने पर व्यापारी उसकी बोली और कम लगाएंगे। इधर, खेतों में गेहूं की बोवनी कर चुके किसानों को बारिश से फायदा है। हालांकि यूरिया की कमी किसानों को परेशान कर रही है। किसान वीरेंद्र पटेल ने बताया कि यूरिया की कमी है। धान की फसल गीली होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई। बारिश देर रात करीब 3 बजे से शुरू हो गई थी। जो रविवार को सुबह 10 बजे तक कभी तेज तो कभी धीमी रफ्तार से होती रही।
पिपरिया। बारिश से मंडी रखी धान की फसल गीली हो गई।
धान की नीलामी समय पर होना चाहिए
मंडीसदस्य मनोहर बैंकर एवं संतोष पटेल ने कहा कि धान की नीलामी प्रक्रिया देरी होने से किसानों को असुविधा होती है। इसलिए नियमित समय पर बोली होना चाहिए। शनिवार को दोपहर बाद नीलामी हुई थी। जिससे किसान परेशान हो गए। किसानों को एक से दो दिन तक मंडी में धान बेचने रुकना पड़ रहा है। मंडी सचिव ऋतु गढ़वाल ने कहा कि बारिश होने के बाद नीलामी काम प्रभावित होता है।
सरकार ने धान पर मंडी टैक्स से छूट दे दी है। मंडी समिति खरीदी पर 2 प्रतिशत मंडी शुल्क लेती है। इस संबंध में शनिवार को मंडी प्रशासन के पास लिखित में सूचना मिल गई है। लेकिन व्यापारियों ने रेट में इजाफा नहीं किया है। मंडी अध्यक्ष दिनेश पटेल ने बताया कि इस बात की समीक्षा करेंगे कि व्यापारी छूट के बाद दाम बढ़ा रहे हैं या नहीं। सोमवार से इसकी निगरानी करेंगे। छूट के बाद 25 से 50 रुपए तक उछाल आने की संभावना है। टैक्स में छूट से मंडी की आय प्रभावित होगी। मजदूर प्रतिनिधियों ने मंडी में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सीधे नीलामी पर सहमति दे दी। मजदूर प्रतिनिधि श्रीगोपाल गांगूड़ा, साहबसिंह, हरि बाथरे, महेश मौर्य आदि ने कहा कि प्रयास करके देखेंगे। इस व्यवस्था में कमियां उजागर होने के बाद उन्हें मंडी प्रशासन दूर करे