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रास्ता खुलवाने सड़क पर बैठे बंदीछोड़ पिपरिया के ग्रामीण
बंदीछोड़ पिपरिया के 50 से अधिक ग्रामीणों ने शनिवार को तहसील कार्यालय के सामने पहुंचकर सड़क पर धरना देकर रास्ता रोक लिया। दरअसल बंदीछोड़ पिपरिया के ग्रामीण गांव के लोगों के लिए तथा स्कूल जाने के लिए रास्ता खोले जाने की मांग कर रहे थे। जानकारी अनुसार गांव के कुछ लोगों द्वारा शासकीय गोहे पर कब्जा कर लिया है और ग्रामीणों के आने जाने का रास्ता तक बंद कर दिया है। जबकि दूसरी ओर इंदिरा आवास एवं प्राथमिक स्कूल बना हुआ है।
इस बात की शिकायत ग्रामीणों ने सोमवार को तहसीलदार विंकी सिंगमारे को ज्ञापन सौंपकर की थी। लेकिन प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया गा, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और वे सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। दोपहर करीब 2:45 बजे तहसील कार्यालय के सामने राजमार्ग क्रमांक 22 पर बैठे बंदीछोड़ पिपरिया के ग्रामीण महिला पुरुषों के कारण यातायात अवरूद्ध हो गया और देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतारें लग गई। इस दौरान मौके पर कोई भी बड़ा अधिकारी उपस्थित नहीं था। ग्रामीणों के आंदोलन के लगभग 20 मिनट बाद प्रशासन की ओर से एसडीएम नवीत धुर्वे मौके पर पहुंचे तथा उन्होंने ग्रामीणों की बात सुनी और सड़क से हट जाने को कहा। लेकिन ग्रामीण रास्ता खुलवाने की अपनी मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक अधिकारियों एसडीएम सहित तहसीलदार विंकी सिंगमारे, एसडीओपी अर्जुन लाल उइके, एस आई इंद्रसेन बैस, एचके शुक्ला आदि की उपस्थिति में ग्रामीण सड़क पर ही बैठे रहे और चर्चा चलते रही। एसडीएम श्री धुर्वे बंदीछोड़ पिपरिया के पटवारी एवं संबंधित आरआई का नाम पता करते देखे गए। तब तक रास्ता रूकने के तीस मिनट गुजर चुके थे। प्रशासन द्वारा जब यह कहा गया कि अधिकारी जाकर सीमांकन कर रास्ता खुलवाएंगे तब ग्रामीण सड़क से हटे। प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व कर्मचारी बंदीछोड़ पिपरिया रास्ता खुलवाने के लिए भेजे गए।
शनिवार के इस प्रदर्शन में बंदीछोड़ पिपरिया के बलवंत पुर्विया, छन्नूलाल, गुलाब, हाकम सिंह, कल्लू, देवेन्द्र, सुमित्रा बाई, रामकंुअर बाई, रेवती बाई, बड्डो बाई एवं फूलियां बाई आदि शामिल थे। ग्रामीण प्रदर्शन के दौरान यह कहते देखे गए कि गांव में 18 एकड़ का शासकीय रकबा है, लेकिन निकलने को रास्ता नहीं है। इस शासकीय भूमि पर लोगों ने कब्जा कर रखा है।
सोहागपुर. एस