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नृत्य की मुद्राओं से भावना व्यक्त करना सिखाया

6 वर्ष पहले
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प्रसिद्धकथक डांसर शैलजा नलवड़े इन दिनों पिपरिया में हैं। वे स्पिक मैके संस्था दिल्ली से यहां आईं हुई हैं। संस्था स्कूली और कॉलेज छात्राओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत और कला के प्रति जागरूकता और रुचि पैदा करने के उद्देश्य से काम कर रही हैं। वे कथक डांस की प्रस्तुति देकर भारतीय संस्कृति के बारे में छात्राओं को जागरूक कर रही हैं। शैलजा कथक नृत्य और उससे जुड़ा विधाओं की प्रारंभिक जानकारी दे रहीं हैं।

मंगलवार दोपहर में कथक डांसर शैलजा और उनके सहयोगी शहर के सरकारी गर्ल्स कॉलेज पहुंची। उन्होंने यहां छात्राओं को कथक नृत्य के बारे में बताते हुए कहा कि इसमें मुख मुद्रा और हावभाव के माध्यम से अभिव्यक्ति दी जाती है, क्योंकि नृत्य के दौरान बोल नहीं सकते हैं। इसलिए मुद्राओं से भावनाओं को व्यक्त किया जाता है। कथक राजस्थान और उत्तरभारत की नृत्य शैली है। मध्यकाल में इसका संबंध कृष्ण कथा और नृत्य से था।

कथक डांसर शैलजा ने भगवान शंकर की आराधना और भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रसंगों को कथक के माध्यम से प्रस्तुत कर छात्राओं से सवाल भी किए। कॉलेज छात्राओं को यह कार्यक्रम खूब भाया। उन्होंने अपने सवाल भी किए। गौरतलब है कि स्पिक मैके संस्था का हेडक्वार्टर दिल्ली में है। इसका गठन 1977 में हुआ था। यह संस्था भारतीय शास्त्रीय संगीत और कला से जुड़े मामलों में युवाओं के बीच काम करती है। डांसर शैलजा शुक्रवार तक पिपरिया में रुकेंगी।

पिपरिया। सरकारी गर्ल्स कॉलेज में कथक नृत्य की प्रस्तुति देकर नृत्य के बारे में समझाती हुई कथक डांसर शैलजा नलवड़े।