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{जहां जाने से डरते थे लोग, उस मुक्तिधाम में गूंज रही बच्चों की चहक

6 वर्ष पहले
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{जहां जाने से डरते थे लोग, उस मुक्तिधाम में गूंज रही बच्चों की चहक

{संभाग के लिए मॉडल है पोरसा का मुक्तिधाम

सतेंद्रसिकरवार/कमलेश मिश्रा|पोरसा

मुक्तिधामका नाम सुनते ही मन में एक उजाड़-वीरान जगह का नजारा दिमाग में बन जाता है लेकिन पोरसा का मुक्तिधाम ऐसा है, जहां सुबह के वक्त बच्चे, बूढ़े, जवान महिलाएं मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं, वहीं औषधीय मनमोहक सुंगंधित फूलों से लदे पेड़-पौधों से मिलने वाली प्राणवायु सत्यम-शिवम-सुंदरम के अर्थ को परिपूर्ण करती है।

दरअसल मुक्तिधाम का यह कायाकल्प किया है लॉयंस क्लब के अध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता ने। जिन्होंने नगरवासियों के सहयोग से पोरसा के मुक्तिधाम को एक ऐसे मॉडल के रूप में तैयार किया, जिसके बारे में सुनकर लोग अचरज करते हैं। पोरसा के मुक्तिधाम को सत्यम, शिवम, सुंदरम की थीम पर तीन अलग-अलग भागों में बांटकर तैयार किया गया है।