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\"अपराध करने और सहने वाले दोनों दोषी\'

6 वर्ष पहले
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महिला सशक्तिकरण के तहत विधिक साक्षरता सम्मेलन आयोजित

भास्करसंवाददाता| पोरसा

अपराधकरने के साथ उसे सहने वाला भी बराबर का दोषी होता है। अपराध होता देख महिलाएं केवल न्यायालय में मामला दर्ज कराएं, बल्कि अन्याय का विरोध करते हुए अपराधिययों के खिलाफ कार्यवाही करने में न्यायालय की मदद करें। यह वक्तव्य रविवार को एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय के सभागार में सिविल जज सुधीर ठाकुर दे रहे थे। वे यहां महिला सशक्तिकरण के तहत आयोजित विधिक साक्षरता सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं को सिविल जज ने घरेलू हिंसा अधिनियम, बाल विवाह निषेद अधिनियम (लाड़ो अभियान), पीसी पीएनडीटी एक्ट की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने कहा कि गर्भ मे पल रहे शिशु की लिंग जांच कराना दंडनीय अपराध है। इसी तरह 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह करना भी गैर कानूनी है। दोनों अपराधों में दोषी व्यक्तियों को सजा देने का प्रावधान है। कार्यक्रम के दौरान बीएमओ डॉ मेवाफरोश, डॉ मनोज कुमार गुप्ता ने बाल अधिकारों के सरंक्षण पर महत्वपूर्ण जानकरी दी।