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अब तक नहीं आई गाइड लाइन

7 वर्ष पहले
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कॉलेजोंमें सेमेस्टर प्रणाली को लेकर होने वाले मतदान को लेकर अब तक कोई गाइड लाइन नहीं आई है। इससे 29 सितंबर को चुनाव होंगे या नहीं, इस पर संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि सेमेस्टर प्रणाली पर फैसला करने की जिम्मेदारी छात्रों पर छोड़ने के बाद उच्च शिक्षा विभाग मतदान प्रणाली को लेकर गाइडलाइन जारी करना ही भूल गया।

उच्च शिक्षा विभाग से कोई दिशा निर्देश नहीं आने से काॅलेजों में चुनाव कराने को लेकर किसी भी स्तर पर कोई तैयारी नहीं की जा रही है। मतदान के लिए जो तारीख 29 सितंबर तय की गई है, उसके लिए मात्र दो दिन बचे हंै। छात्रों की मतदान प्रक्रिया की तैयारियों को लेकर जब कॉलेजों द्वारा उच्च शिक्षा विभाग में संपर्क किया जाता हंै तो वहां से कोई भी ठोस जवाब नहीं दिया जा रहा है। किसी भी तरह की गाइड लाइन ना होने के कारण कॉलेज भी अब सुस्त मुद्रा में गए हैं। कॉलेजों के प्राचार्यों का कहना है कि इस मामले में जब से मतदान से फैसला लेने की अधिकारिक जानकारी सामने आई है, तब से वे कई बार इस मुद्दे पर संपर्क कर चुके हंै, मगर उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी गाइडलाइन को लेकर अनभिज्ञ हैं।

असमंजस में हैं विद्यार्थी

इसजनमत संग्रह को लेकर विद्यार्थी भी असमंजस की स्थिति में हैं। काॅलेज के छात्रों से जनमत संग्रह को लेकर चर्चा की गई तो स्नातक के छात्र अमित शर्मा, गौरव कुमार और संदीप कुशवाह का कहना था कि सेमेस्टर प्राणाली वैसे तो ठीक है, परंतु परीक्षाएं समय पर नहीं हो पाती हैं, जिससे रिजल्ट देर से आता है। इससे उनको परेशानियां होती हैं। वहीं कुछ छात्र संगठन इस प्रणाली का विरोध करते रहे हैं। मगर इस प्रणाली को बदले जाने की सबसे बड़ी वजह कॉलेजों में प्राध्यापकों और स्टाफ की कमी बताई जा रही है।

नहीं आए कोई निर्देश

^सेमेस्टरप्रणाली को लेकर २९ सितंबर को मतदान होना है, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग से इस संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं। चुनाव होंगे या नहीं, अब इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। डॉ.पीएस कापसे, प्राचार्यस्वामी विवेकानंद कालेज रायसेन

सेमेस्टर प्रणाली के फायदे

{सेमेस्टरप्रणाली से छात्रों के परीक्षा परिणाम में अच्छा सुधार हो रहा है, उन्हें प्रतिशत में सीसी आदि की वजह से लाभ मिल रहा है।

{सेमेस्टर प्रणाली से छात्रों की उपस्थिति में अच्छा सुधार देखन