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मित्रता हो तो सुदामा और कृष्ण जैसी : शर्मा

7 वर्ष पहले
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जोगलत राह दिखाए रास्ते में मुसीबत के समय छोड़ कर चला जाए, ऐसे मित्रों से सावधान रहें। इसके साथ ही जो गलत संगति दे, जैसे गुटखा,सिगरेट, बीड़ी, शराब सहित अनेक बुरी लत की तरफ ले जाए वह मित्र नहीं, बल्कि उसे आप अपना सबसे कट्टर दुश्मन समझें। अच्छे मित्र धर्म और ज्ञान की अच्छी राह दिखाते हंै। मित्रता हो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी जो कि बिना स्वार्थ की थी। तभी तो सुदामा ने अति विपत्ति और गरीबी में तो भगवान का भजन छोड़ा और ही भगवान श्रीकृष्ण से मित्रता होने के बाद भी उन्होंने उनसे कुछ मांगा। अवंतिका कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि बुरा समय सबका आता है। हर व्यक्ति एक बार सुदामा की तरह गरीबी और परेशानी में घिर जाता है, लेकिन जो भगवान को अपना सर्वस्व मान लेता है, उसे भगवान चाहे सुख हो या दुख उसे परेशानी नहीं आने देता है। उन्होंने कहा कि सुदामा के अतिगरीबी के हाल को भगवान श्रीकृष्ण को पता था, लेकिन गरीब सुदामा ने अपनी गरीबी का हाल तो भगवान को सुनाया और ही उसने उनकी पक्की मित्रता का फायदा उठाया, लेकिन जब उसकी प|ी सुशीला ने द्वारकाधीश के महल जाने की जिद पकड़ ली तो सुदामा निकल पड़े अपने मित्र से मिलने। उन्होंने कहा कि सुदामा संतोषी ब्राह्मण थे और एक दिन में केवल 5 से 7 घरों में ही भिक्षा मांगने जाते थे। अगर उन्हें इन घरों से भिक्षा नहीं मिलती थी तो वे पानी पीकर संतोष कर लेते थे।

श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को सातवां दिन था। इस दिन कथा सुनने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण की आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया।

रायसेन। कथामें शनिवार को कृष्ण सुदामा मित्रता प्रसंग का मंचन किया गया।

रायसेन। भागवतकथा में बड़ी संख्या में आए श्रद्धालु।