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जर्मनी के प्रोफेसर सांची बोवि मेंे पढ़ाएंगे संस्कृत

6 वर्ष पहले
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सांचीबौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में गुरुवार से तीसरा पाठ्यक्रम शुरू हो रहा है। दो माह के इस पाठ्यक्रम में संस्कृत सीखने की इच्छा रखने वाला या किसी भी उम्र का व्यक्ति शामिल हो सकता है। संस्कृत भाषा शिक्षण पाठ्यक्रम में छात्र संस्कृत भाषा को समझना, बोलना और अनुवाद करना सीखेंगे। खास बात यह है कि सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति और संस्कृत भाषा की विद्वान डॉ. प्रो. शशिप्रभा कुमार संस्कृत पाठ्यक्रम की प्रमुख आचार्य होंगी।

सांची विश्वविद्यालय में उच्चतम प्रतिमानों की ज्ञान परंपरा पर चलते हुए जर्मनी के लीपजिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सदानंद दास भी छात्रों को एक महीने तक संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देंगे। सांची विवि में संस्कृत सीखने के पाठ्यक्रम में 4 विदेशी छात्रों ने भी पंजीयन कराया है। विदेशी छात्रों में दो जर्मनी, एक बेल्जियम और एक कोरिया से है। पाठ्यक्रम के संयोजक डॉ. विश्वबंधु होंगे। संस्कृत भाषा शिक्षण प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के दौरान शिक्षण का माध्यम हिंदी और अंग्रेजी का मिला-जुला रूप होगा। सांची विश्वविद्यालय के बारला कैंपस में सभी छात्रों को मुफ्त छात्रावास सुविधा दी जाएगी। छात्रों को सिर्फ भोजनालय में खाने का पैसा देना होगा।

12वीं पास होना अनिवार्य : संस्कृतपाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए छात्र को महज 12वीं पास होना जरूरी है। किसी भी उम्र का व्यक्ति इस कोर्स से जुड़ सकता है। संस्कृत भाषा शिक्षण के दौरान संस्कृत भाषा के उच्चारण और उसके विभिन्न तरीकों के साथ संस्कृत भाषा के वाक्य विन्यास को सीखने में भी सहायक होगा। पाठ्यक्रम मूल संस्कृत की पुस्तकों जैसे- वेद, उपनिषद, वाल्मीकी रामायण, भागवत गीता और नीतीष्टकम का अध्ययन करने पर भी केंद्रित होगा। छात्रों को संस्कृत में उपलब्ध प्राचीनतम और समृद्ध स्रोतों के अध्ययन के तरीकों को भी बताया जाएगा जिससे वे पूर्व में उपलब्ध संस्कृत के विज्ञान, आध्यात्म, कला, इतिहास, व्याकरण, छंद, अंतरिक्ष विज्ञान, वास्तु, योग, आयुर्वेद, धर्म और दर्शन का गहन अध्ययन कर सकें।

संस्कृतभाषा की समझ पैदा करना उददेश्य : संस्कृतभाषा शिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने का उद्देश्य सिर्फ संस्कृत भाषा की समझ पैदा करना है बल्कि, उस स्तर तक संस्कृत भाषा सिखाना है जिससे छात्र इस भाषा में भारतीय दर्शन का अध्ययन कर सकें। भारतीय दर्शन की तीन प्रमुख शाखाओं हिंदुत्व, बौद्ध दर्शन और जैन दर्शन की लाखों किताबों की भाषा संस्कृत ही है।

सांची बौद्ध विश्वविद्यालय का परिसर।

संस्कृत पाठ्यक्रम