डाक्टर के फोन पर भी नहीं आया जननी वाहन
सोमवाररात को जननी सुरक्षा वाहन के आने से एक प्रसूता की हालत बिगड़ गई। इस कारण इलाज करने वाले डाॅक्टर भी परेशान हुए। वार्ड 7 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सफिया बी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया।
पुत्र की नाजुक स्थिति को देखते हुए ड्यूटी पर मौजूद डाॅ. नीलेश चौरसिया ने जच्चा-बच्चा को जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया और स्वयं जननी वाहन के लिए फोन लगाया। रात एक बजे से चार बजे तक डॉक्टर चौरसिया स्टाफ नर्स अनुराधा सिंह एवं ऊषा कार्यकर्ता कमला चौहान ने कई बार जननी सुरक्षा वाहन के चालक लोकेश गौर एवं काल सेंटर रायसेन फोन लगाया। एक बार काल सेंटर ऑपरेटर निसात बेग द्वारा काल रिसीव करने के बाद दोबारा काल रिसीव नहीं किया गया।
आखिरकार डाॅ.चौरसिया ने 108 एंबुलेंस पर काल किया। इस पर चालक अर्जुन राय चार बजे 108 वाहन लेकर अस्पताल पहुंचे और जच्चा-बच्चा को रायसेन लेकर रवाना हो गए। इस संबंध में डाॅ.नीलेश चौरसिया का कहना है कि जननी सुरक्षा वाहन को कई बार सूचना देने के बाद भी वाहन नहीं आता है जिससे महिलाओं एवं बच्चों की जान का खतरा बढ़ जाता है। जननी सुरक्षा वाहन चालक एवं जिला मुख्यालय स्थित काल सेंटर के आॅपरेटरों के खिलाफ उचित कार्रवाई होना चाहिए।