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कथा के श्रवण से होता है कल्याण

6 वर्ष पहले
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यशवंतनगर में गुरुवार से शुरू हुई श्रीमद‌् भागवत कथा के पहले दिन कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा पाटनदेव हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कथा स्थल पहुंची। कलश यात्रा का श्रद्धालुओं द्वारा पूष्प बरसाकर जगह-जगह स्वागत किया गया। कथा स्थल पर कथा वाचक पं भगवानदास दीक्षित ने भागवत पुराण की विशेष पूजा-अर्चना कर कथा की शुरुआत की।

इस अवसर पर पं. दीक्षित ने कहा कि इस संसार में भगवान की भक्ति के बिना मनुष्य का उद्धार संभव नही है। इस कारण प्राणी को जब भी समय मिले तब भगवान के नाम का स्मरण करते रहना चाहिए, क्योंकि पता नहीं कब इस प्राणी के प्राण पखेरू उड़ जाए। पंडित दीक्षित ने कहा कि कलयुग के आरंभ से पहले राजा परीक्षित से इस संसार में स्थान देने के लिए कई बार आग्रह किया, लेकिन जब राजा परिक्षित ने कलयुग को आने का भरपुर प्रयास किया। युग परिवर्तन के साथ परिक्षित को इस संसार में प्रवेश करवाना पड़ा। राजा परिक्षित ने कलयुग को जुआ घर, मदिरा लय, वैश्यालय ,स्वर्ण ओर जहां लडा़ई झगड़े होते हो ऐसे स्थानों कलयुग को स्थान दे दिया गया। इसके प्रभाव के कारण के राजा परिक्षित वन में शिकार करने के लिए गए तब हार थककर उन्हें बड़ी जोर से प्यास लगी तो वह एक ऋषि के आश्रम में पहुंचे। जहां कलयुग अपना प्रभाव दिखाते हुए राजा से ऋषि का अपमान हो गया।

पं दीक्षित ने कहा कि राजा ऋषि के अपमान और ऋषि पुत्र के श्राप से चिंतित हुए ओर उन्हेंं सुखदेव जी ने सात दिन की भागवत कथा सुनाना प्रारंभ कर दी। उन्होंनें कहा कि सात दिन की भागवत कथा के श्रवण से इस पाप रूपी काया को मुक्ति मिल जाती है। इस लिए भक्तिों को पुरी भक्ति ओर श्रद्धा भाव के श्रीमद‌् भागवत कथा का अमृत रस पान करना चाहिए।

पितामह अिद्वतीय व्यक्तित्व के धनी

उदयपुरा|भीष्मपितामहअद्वितीय व्यक्तित्व के धनी इसलिए भी कहलाते हैं क्योंकि उन्हें भगवान की ओर से इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। बाणों की शैया पर सोये हुए पितामह के समक्ष जब स्वयं ब्रह्मा खडे हुए थे। उन्होंने इस समय मरना ही उचित समझा। व्यक्ति भगवान को प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या और कई जतन करता है तथा अंतिम समय में भगवान के दर्शन के लिए लालायित रहता है परंतु पितामह के अंतिम समय में स्वयं ब्र हा सामने खडे थे। यह विचार श्री कृष्ण कथा रसधारा के द्वितीय दिवस पंडित अवधेश कृष्ण चौबे ने स्थानीय रामजानकी मंदिर में व्यक्त किए। उन्होंने कृष्ण और सुदामा के चरित्र का बडा मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हमेशा सत्य बोलना चाहिए और सत्य की राह पर चलकर ही व्यक्ति अपने व्यक्तिव को चमकाता है व्यक्ति को अपराधी को क्षमा करना, पराई स्त्री से दूर रहना ,दूसरों के धन पर नजर डालना इन तीन आदतों का हमेशा पालन करना चाहिए। इसी से व्यक्ति का व्यक्तिव चमकता है। जिसका परिणाम उसके चेहरे पर प्रतिलक्षित होता है कथा से पहले एक कलश यात्रा लिकाली गई। कथा का मंच संचालन पं. पवन शास्त्री द्वारा किया जा रहा है संगीतमय इस कथा को सुनने बडी संख्या में लोग स्थानीय रामजानकी मंदिर पहुंच रहे है इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष केशव पटेल, राजपाल पटेल, कमलेश नायक, पप्पू समेले, बिट‌्टू नायक उपस्थित रहे।

कथावाचक पं. अवधेश कृष्ण चौबे।

यशंवत नगर में भागवत कथा शुरू हुई। इसके पहले कलश यात्रा निकली गई।