खेल में सीखा स्वच्छ रहने का सलीका
स्वच्छताके महत्व को कहानी के माध्यम से बताकर स्कूली बच्चों को हाथों में कलर पेंसिल थमाई तो छात्रों ने कागज पर स्वच्छता के विभिन्न आयाम उकेर दिए। इन कागजों की शीट पर बच्चों ने जिस तरह स्वच्छ शहर और गांव की कल्पना को आकार दिया वह अगर वास्तविक आचरण में उतर जाए तो पूरा देश स्वच्छ भारत बन जाए। और इसी उद्देश्य को लेकर स्वयंसेवी संस्था समर्थन द्वारा बाल स्वच्छता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
बुधवार से शुरू हुए इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्वच्छता के प्रति बच्चों को जागरूक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। गुरुवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया था। जिसकी शुरूआत में राजस्थान से आए संस्था के विजय शाही द्वारा खेलों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छ रहने और वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डांस, भाषण, मिमिक्री, खेल सहित अन्य कार्यक्रम भी किए गए। करीब 5 घंटे चले इस कार्यक्रम में बच्चे भी खूब उत्साहित हुए।
जागरूक करना आसान
महात्मागांधी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक कई लोगों ने स्वच्छ भारत बनाने की परिकल्पना की है। लेकिन देश को वास्तव में स्वच्छ भारत बनाना है तो बच्चों के दिल दिमाग में इस विचार को उतारना होगा। बाल मन में जो खेल-खेल के माध्यम से भाव उतरता है वह व्यक्ति की प्रवृत्ति में आता है। स्वच्छता के लिए प्रवृत्ति से जागरूक होना जरूरी है। इसलिए स्कूलों में बच्चों को मु रूप से स्वच्छ रहने, स्वच्छ पानी पीने और स्वच्छ वातावरण रखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसी भाव को लेकर बच्चों से ही स्वच्छता के स्वरूप का प्रकटीकरण करवाया गया था।
आयोजन
सिंधी धर्मशाला में स्वच्छता के प्रति बच्चों को जागरूक किया गया।