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बौद्ध विश्वविद्यालय में संस्कृत पाठ्यक्रम शुरू
सांचीबौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा शिक्षण पाठ्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महीने भर के इस पाठ्यक्रम में संस्कृत सीखने और बोलने के साथ संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों को पढ़ाया जाएगा। सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति और संस्कृत भाषा की विद्वान डॉ. शशिप्रभा कुमार संस्कृत पाठ्यक्रम की प्रमुख आचार्य हैं। सांची विश्वविद्यालय में उच्चतम प्रतिमानों की ज्ञान परंपरा पर चलते हुए जर्मनी के लीपजिग़ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सदानंद दास भी छात्रों को एक महीने तक संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देंगे।
पाठ्यक्रम के शुभारंभ कार्यक्रम में कुलपति डॉ. शशि प्रभा कुमार ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे परिस्कृत भाषा है और इसका शब्द भंडार भी अकूत है। डॉ. कुमार ने कहा कि संस्कृत में एक ही शब्द के 100 तक पर्यायवाची शब्द होते हंै। उन्होंने कहा कि संस्कृत की सूक्तियां और सुभाषित हमें जीवन का विचार और दर्शन भी सिखाते हैं।
इस मौके पर जर्मनी के लीपजिग़ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सदानंद दास ने कहा कि संस्कृत के लिए यूरोपीय छात्रों में खासी रुचि है लेकिन हमारे देश में इसे सीखने और अपनाने वाले घट रहे हैं जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गीता पर वहां काफी शोध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत सीखने में सुभाषित काफी मददगार साबित हो सकते हैं। संस्कृत सीखने के पाठ्यक्रम में जर्मनी बेल्जियम और कोरिया से 3 विदेशी छात्रों ने भी पंजीयन कराया है। पाठ्यक्रम में संगीत में पीएचडी कर चुके रिटायर्ड बैंक अधिकारी भी शामिल हैं।