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जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्रिस्टल
कार्यालय संवाददाता | रायसेन
दशहरामैदान स्थित सामुदायिक भवन में अंतरराष्ट्रीय स्फटिक शास्त्र के उपलक्ष्य में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। मप्र विज्ञान एवं प्रौद्यागिक परिषद एवं शासकीय कन्या महाविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. हबीब उल्लाह उस्मानी भोपाल, डॉ. ज्ञान प्रताप सिंह, डॉ. अमित जैन, कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. दीप्ति सेन और कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऊषा सोलंकी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
कार्यशाला में इन अतिथियों ने पॉवर पाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से क्रिस्टेलोग्राफी के बारे में विस्तार से समझाया। इस दौरान अतिथियों ने छात्राओं की कई शंकाओं का भी समाधान किया। इस असवर पर भोपाल से आए क्रिस्टेलोग्राफी विशेषज्ञ डॉ. हबीब उल्लाह उस्मानी ने कहा कि र|, मोती, हीरा, पन्ना, नमक, शकर, बर्फ, सहित अन्य ठोस तत्व क्रिस्टल के रूप में पाए जाते है। इन क्रिस्टलों का संबंध लोगों से सालों से चला रहा है। यह कहीं कहीं पर लोगों को प्रभावित भी करते हैं। मानव शरीर में पाया जाने वाला डीएनए क्रिस्टल की संरचना है। विज्ञान में क्रिस्टल विशेष महत्व है। कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. दीप्ति सेन ने बताया कि वर्ष 2014 को यूनेस्को द्वारा क्रिस्टेलोग्राफी वर्ष घोषित किया गया है। आज से ठीक 100 साल पहले मैक्स फॉन लोएको एक्स-रे की मदद से क्रिस्टन संरचना करने की विधि की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान कर मानित किया गया। क्रिस्टल की संरचना पता करने का काम विलियम लॉरेंस ब्रेग ने अपने पिता विलियम हेनरी के साथ मिलकर किया था। उन्होंने नमक यानी सोडियम क्लोराइड के रवे की संरचना का खुलासा एक्स-रे डिफ्रेक्शन विधि से किया था। इसके लिए उन्हें संयुक्त रूप से 1915 में नोबेल पुरस्कार मिला था।
रायसेन। कन्यामहाविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यशाला में उपस्थित शिक्षक छात्राएं।