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कैलेंडर के अनुसार नहीं हो पा रहा योगाभ्यास
स्कूलशिक्षा विभाग द्वारा छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए कैलेंडर तैयार किया गया था, लेकिन इस कैलेंडर के अनुसार तो खेलों का प्रशिक्षण दिया जा सका और ही योग का अभ्यास हो पाया है। सत्र 2014-15 में जुलाई से हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, योग और स्वास्थ्य की शिक्षा प्रतिदिन देने के लिए लाखों रुपए खर्च किए गए थे।
जून में जिले के खेल अधिकारियों और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। योजना के अनुसार प्रशिक्षण के बाद स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक कालखंड अनुसार प्रतिदिन खेल, योग और स्वास्थ्य संबंधी पाठ पढ़ाया जाना था। इसके लिए खेल, योग और स्वास्थ्य विषय का कालखंडवार कैलेंडर भी जारी किया गया था। शासन के लाख प्रयासों के बाद भी स्कूलों में स्टूडेंट्स को नियमित प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। छात्रों को खेल पीरियड के नाम पर केवल मैदान में छोड़ दिया जाता है। शिक्षकों द्वारा उन्हें विधिवत ट्रेनिंग नहीं दी जा रही है।
शिक्षकोंकी कमी बरकरार : प्रशिक्षितमास्टर ट्रेनर शिक्षकों ने जिले के सभी खेल शिक्षकों को स्कूलों में खेल, योग और स्वास्थ्य संबंधी पढ़ाई का प्रशिक्षण दिया था। 16 जून से सत्र शुरू होने के बाद जुलाई माह तक शिक्षकों के पद रिक्त होने और अतिथियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण यह कालखंड नहीं लग पा रहे हैं।
स्कूलों में खेल शिक्षक के 122 पद रिक्त हैं, महज 33 शिक्षक ही तैनात हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार स्कूलों में निर्धारित कैलेंडर के अनुसार कोई भी प्रशिक्षित शिक्षक ये गतिविधियां संचालित करवा सकता है। इसके बावजूद कक्षाएं नहीं चल पा रही हैं। इसका एक दूसरा कारण यह भी है कि छात्रों में खेलों के प्रति रुचि नहीं दिखाई दे रही है।
खेल शिक्षकों की कमी है
^छात्रोंके बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए खेलना बहुत ही जरूरी है। स्कूल के अलावा छात्रों को खेलने का मौका अभिभावकों के दबाव के कारण नहीं मिल पा रहा है। वहीं कई स्कूलों में खेल शिक्षकों की कमी भी है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। एसपीत्रिपाठी, जिलाशिक्षाधिकारी रायसेन