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स्कूल में खेल का पीरियड पर मैदान ही नहीं

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता | रायसेन

जिलेके अधिकतर स्कूलों में खेल के लिए मैदान तक नहीं है। मैदान के अभाव में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अधर में लटका नजर आने लगा है, जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस पर देश भर के बच्चों को खूब खेलने की सलाह दी है। वहीं स्कूलों के हालात देखकर समझ रहा है कि खेलने पर तो नहीं स्कूलों में बगैर बिजली और पंखों के जरूर पसीना रहा है।

शिक्षक दिवस पर प्रसारण हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह दी है कि बच्चों को खूब खेलना चाहिए, खूब पसीना बहाएं। अब विडंबना ये है कि बच्चे आखिर खेले कहां। खेलने के लिए स्कूलों में भी खेल का कालखंड निर्धारित होता है, लेकिन मैदानों के अभाव में खेल का कालखंड भी बेकार साबित हो रहा है।

बच्चों के लिए खेलने का सबसे बेहतर स्थान स्कूल है, लेकिन जिले में 155 हायर सेकंडरी और हाई स्कूल हैं। इनमें से जिला मुख्यालय पर स्थित उत्कृष्ट विद्यालय सहित 101 स्कूलों में खेलने को मैदान तक नहीं हैं। वहीं अधिकतर माध्यमिक शालाओं की भी लगभग ऐसी ही स्थिति है।

खुद के भवन में नहीं लगते जिले के कई स्कूल

जिलेमें शासकीय 132 हायर सेकंडरी और हाई स्कूलों के पास भवन हैं, शेष 23 स्कूल किराए के भवन में ही संचालित किए जाते हैं। हालांकि इन स्कूलों में से अधिकतर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा संसाधनों के अभाव में गली-गली में खुले निजी स्कूलों में बच्चों की फजीहत हो रही है। जबकि निजी स्कूल संचालक कागजों में दिखा देते हैं कि स्कूल में मैदान सहित बच्चों के लिए सारी सुविधाएं हैं। इन स्कूलों में बच्चों का पसीना सिर्फ भारी-भरकम स्कूल बैग उठाने में ही निकलता है, खेलने-कूदने में नहीं।

स्कूलों में संसाधनों की कमी

शासकीयस्कूलों को शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की खेल सामाग्रियां उपलब्ध कराई जाती हैं। बॉलीबाल, रेकिट, रिंग, फुटबॉल, बेट बॉल, केरम, शतरंज, रस्सी सहित कई प्रकार के साधन दिए जाते हैं। लेकिन कई स्कूलों में बच्चों को खेल सामग्रियां उपलब्ध ही नहीं होती हैं। कुछ स्कूलों में मैदान नहीं होने का बहाना होता है, तो कई में बच्चों की रुचि नहीं लेने की बात की जाती है। अब शासन की मंशानुरूप बच्चों के विकास की बाते हवा में नजर रही हैं।

स्कूलों में कराया जा रहा भवनों का निर्माण कार्य

^स्कूलोंमें मैदानों के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।