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कम दाम, देर से भुगतान

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता | रायसेन

कृषि उपज मंडी में धान कम कीमत मिलने के बावजूद किसानों को उपज बेचना मजबूरी है। व्यापारी इसका मन चाहा लाभ उठा रहे हैं। उपज खरीदने के बाद भी किसानों को 8-10 दिनों में भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में किसान व्यापारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं बुधवार को कम कीमतों के चलते मंडी में नीलामी देरी से शुरू हो सकी। इससे किसानों में आक्रोश है।

पिछले वर्ष हुई फसलों की के बाद आधा अधूरा मुआवजा लेकर किसान आर्थिक संकट में गुजारा कर रहे थे। इससे उबरने के लिए अधिकतर किसानों ने धान की बोवनी की थी। उत्पादन अच्छा होने से कृषि उपज मंडी में धान की बंपर आवक हो रही है, लेकिन किसानों को कीमत सही नहीं मिल रही है। वहीं कम निर्यात होने के कारण प्रदेश में भी धान की कीमत कम हो गई है। अब कम दाम में भी बेचने के बाद किसानों को व्यापारियों द्वारा नगद भुगतान नहीं किया जा रहा है।

व्यापारियों को मिला मौका

लंबे समय से मंडी में गिने-चुने व्यापारियों द्वारा खरीदी की जा रही थी। ऐसे में मंडी प्रबंधन समिति बाहर के व्यापारियों को मंडी की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी। प्रयासों के बाद अब मंडी में बड़े व्यापारियों ने रुचि दिखाई है। मंडी में बाहर के दो व्यापारियों द्वारा भी खरीदी शुरू की गई है।

8 दिन बाद मिलेगी राशि

17क्विंटल धान लेकर आया हूं। व्यापारी द्वारा अभी 25 फीसदी भुगतान किया गया है। शेष भुगतान 8 दिन बाद करने को कहा गया है। अब उपज बेचना और रुपए लेने का इंतजार करना भी मजबूरी है। मनीराममीणा, ग्रामनांद

किसान लगा रहे चक्कर

कृषिउपज मंडी में मौजूद व्यापारियों द्वारा धान तो खरीदी जा रही है, लेकिन धान की कीमत मौके पर नहीं दी जा रही है। उपज विक्रय का आधा अधूरा भुगतान कर किसानों को 8 से 10 दिनों तक लटकाया जा रहा है। किसान व्यापारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं। अब शादी-विवाह के सीजन में किसानों की जेबें खाली हैं, वहीं बैंकों और ट्रैक्टर की किश्तों का भुगतान करने में लेट लतीफी हो रही है। इससे उन्हें पेनाल्टी का भुगतान करना पड़ रहा है।

बाहर के व्यापारी बुलाए

^व्यापारियोंद्वारा किसानों को उपज का नगद भुगतान किया जाना चाहिए। अगर ऐसी किसी प्रकार की शिकायत आएगी तो मामले को दिखवाएंगे। धान खरीदी व्यवस्था को ध्यान में रखकर बाहर के दो व्यापारियों को भी नीलामी मे