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ओशो का जन्मदिन मनाने बड़ी संख्या में पहुंचे लोग

7 वर्ष पहले
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अद‌्भुत अहसास है ओशो : सत्यतीर्थ भारती

तीनतहसीलों की सीमा पर बसा छोटा-सा गांव कुचवाड़ा में रजनीशचंद्रमोहन का जन्मोत्सव मनाने कई स्थानों के लोग आए। ओशोप्रेमियों ने अपने गुरु ओशो की जन्मस्थली में उनका जन्मदिन नाचते-गाते, हंसते-रोते और ध्यान में मग्न होते मनाया।

गुरुवार को दुनियाभर में चर्चित ओशो के 83 वें जन्मदिवस पर रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव में लोगों का तांता लगा रहा। यहां की माटी में जन्मे रजनीशचंद्र मोहन समय के साथ क्रमश: आचार्य रजनीश, भगवान रजनीश और ओशो के रूप में संपूर्ण विश्व में चर्चित हुए।

एकही दिन खुलता है मकान

दरअसलसाल में एक ही मौका ऐसा होता है, जब ओशो की जन्म स्थली आम लोगों के लिए खुल जाती है। शाम होते ही कुचवाड़ा में कई स्थानों से आए ओशोप्रेमी ओशो तीर्थ से गांव के उस घर की ओर बढ़े, जहां इस असाधारण प्रतिभा ने आंखें खोली थीं। रजनीशचंद्रमोहन के जन्म का साक्षी रहा मकान का कमरा ओशोप्रेमियों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है।

थिरकेकदम, नम हुईं आंखें : करीबएक किलोमीटर तक नाचते-गाते ओशोप्रेमी भाव-विभोर हुए बिना नहीं रह पाए। स्वामी प्रेमतीर्थ बताते हैं कि जीवन को संपूर्णता के साथ जीने का संदेश देने वाले अपने गुरु का जन्म दिन आनंद से भर देने वाला है। गांव के रामसजीवन का कहना था कि उन्होंने कभी ओशो को देखा नहीं, मगर उन्हें इस बात का गर्व है कि यहां वे यहां जन्मे। ऐसे सैकड़ोंं ओशोप्रेमी भाव विभोर होकर नाचते-गाते रहे।

जलेदीप, कटे केक : ओशोकी जन्मस्थली उनकी ही तरह प्राचीन और नवीन का संधिस्थल दिखाई दे रही थी। एक ओर जहां जन्म दिन पर मोमबत्ती जल रही थीं और उत्साही अनुयायी केक काट रहे थे, वहीं दूसरी ओर दीपक जलाकर नारियल चढ़ाकर भी खुशी मनाई जा रही थी।

बरेली। यहहै ओशो प्रेमियों द्वारा निर्मित ओशो तीर्थ। इनसेट- जापान की मां देव कविता द्वारा उकेरे गए ओशो के विभिन्न अवस्थाओं के रूप।