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फील्ड की बजाय आफिसों में डटे हैं टाइम कीपर

7 वर्ष पहले
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निर्माणकार्य की गुणवत्ता परखने का काम करने वाले टाइम कीपर फील्ड में जाने की बजाय आफिसों में डटे हुए हैं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच-पड़ताल नहीं हो पा रही है। यह सब जानने के बाद भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारी अंजान बने हुए हैं। इन टाइम कीपरों को फील्ड में पहुंचाने की बजाय उनसे न-केवल आफिसों में काम करवाया जा रहा है, बल्कि उनका वेतन भी हर माह बिना फील्ड वर्क के निकला जा रहा है।

लोक निर्माण विभाग के रायसेन कार्यालय में टाइम कीपर आरके गौर, सिलवानी उपसंभाग में रामस्वरूप अहिरवार और बरेली उपसंभाग मेें एसके सोनी को अटैच करके रखा गया है। इन टाइम कीपरों को फील्ड में भेजने की बजाय उनसे कार्यालय में काम लिया जा रहा है। कई टाइम कीपर तो वर्षों से आफिसों में अधिकारी से सांठगांठ कर जमे हुए हैं, जबकि शासन के नियमानुसार स्थल सहायकों को फील्ड में पदस्थ किया जाता है और उन्हें अपनी देखरेख में ठेकेदार और मजदूरों से काम कराना होता है, लेकिन रायसेन में शासन के इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। स्थल सहायकों की देखरेख में निर्माण कार्य नहीं होने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

ऑफिस में कम है स्टॉफ

^ऑफिसमें स्टॉफ कम है, इस कारण फील्ड में पदस्थ टाइम कीपरों को ऑफिस में अटैच कर उनसे काम लिया जा रहा है। आफिसों में लंबे समय से बाबुओं की भर्ती नहीं हुई है। इस कारण कई पद लिपिकों के खाली पड़े हुए हैं। केएसपरस्ते, प्रभारीकार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग रायसेन

कौशिक होंगे पीडब्ल्यूडी के नए कार्यपालन यंत्री

लंबेसमय से अवकाश पर चल रहे लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री केके लच्छे का तबादला हो गया है। शासन द्वारा जारी तबादला सूची के अनुसार उनके स्थान पर बैतूल से कार्यपालन यंत्री केएस कौशिक को रायसेन जिले का अधिकारी बनाया गया है, जबकि चार माह से केएस परस्ते कार्यपालन यंत्री का प्रभार संभाल रहे थे। उनका तबादला भी पहले ही टीकमगढ़ हो चुका है। अब वे भी रिलीव हो जाएंगे। वहीं लोक निर्माण विभाग की दूसरी शाखा पीआईयू में भोपाल से आरके नेमा को ईई के रूप में भेजा जा रहा है। पीआईयू शाखा 25 लाख रुपए तक के होने वाले निर्माण कार्यों को देखती है।